अगर आप या आपका कोई परिचित अमेरिका में पढ़ाई कर रहा है और फिलहाल छुट्टियों या किसी अन्य कारण से अमेरिका से बाहर है, तो यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ ने अपने F-1 और J-1 वीजा धारक अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विशेषकर भारतीय छात्रों को सलाह दी है कि वे 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं, अन्यथा नए आव्रजन नियमों का सीधा असर उन पर पड़ सकता है।
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) जल्द ही एक नया “फाइनल रूल” लागू करने जा रहा है। इसके तहत वर्षों से लागू ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (D/S)’ व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा। अभी तक इस व्यवस्था के तहत छात्र अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि तक अमेरिका में रह सकते थे, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह सुविधा सीमित हो जाएगी।
क्या बदलने वाला है?
नए नियमों के अनुसार F-1 (स्टूडेंट), J-1 (एक्सचेंज विजिटर) और I (विदेशी पत्रकार) वीजा धारकों के लिए अमेरिका में रहने की अधिकतम अवधि 4 साल तय की जाएगी।
इसके अलावा, पढ़ाई या एक्सचेंज प्रोग्राम पूरा होने के बाद अमेरिका में रहने के लिए मिलने वाली 60 दिनों की ग्रेस पीरियड को घटाकर 30 दिन कर दिया जाएगा। यदि किसी छात्र को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए चार साल से अधिक समय चाहिए, तो उसे USCIS में Form I-539 के जरिए अलग से अनुमति लेनी होगी।
यूनिवर्सिटीज़ ने क्यों जारी किया अलर्ट?
कोलंबिया यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों ने अपने छात्रों को सलाह दी है कि वे नए नियम लागू होने से पहले अमेरिका लौट आएं। यूनिवर्सिटी ने अपने नोटिस में कहा है कि चूंकि नया नियम जल्द प्रभावी होने वाला है, इसलिए छात्रों को कक्षाएं शुरू होने से पहले ही अमेरिका पहुंच जाना चाहिए।
पुराने छात्रों के लिए क्या व्यवस्था रहेगी?
DHS के अनुसार, जो छात्र 15 सितंबर से पहले D/S व्यवस्था के तहत पहले से अमेरिका में मौजूद होंगे, वे अपने Form I-20 में दर्ज कोर्स समाप्ति की तारीख तक अमेरिका में रह सकेंगे। इसके अलावा, जिन छात्रों का OPT (Optional Practical Training) या STEM OPT पहले से स्वीकृत है, वे उसे भी जारी रख सकेंगे।
हालांकि, यह राहत भी स्थायी नहीं होगी। नए नियम लागू होने के बाद ऐसे छात्रों को भी अधिकतम 4 वर्ष तक ही छूट मिलेगी और किसी भी स्थिति में वे 14 नवंबर 2030 के बाद अमेरिका में नहीं रह सकेंगे।
भारतीय छात्रों में बढ़ी चिंता
इस फैसले ने अमेरिका में पढ़ रहे लाखों भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पीएचडी, रिसर्च और मेडिकल जैसे लंबे कोर्स करने वाले छात्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
Foundation for India and Indian Diaspora Studies (FIIDS) के नीति एवं रणनीति प्रमुख खांडेराव कंद का कहना है कि औसतन ग्रेजुएशन पूरा करने में करीब 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में 5.7 साल लगते हैं। ऐसे में चार साल की सीमा कई छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि USCIS में पहले से लाखों आवेदन लंबित हैं, जिससे अतिरिक्त अनुमति मिलने में भी काफी समय लग सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है, तो इसका असर केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों के रिसर्च प्रोजेक्ट्स, मेडिकल रिसर्च और फैकल्टी भर्ती पर भी पड़ सकता है। इसलिए कई संस्थाओं ने सरकार से इस नियम पर दोबारा विचार करने और इसके लागू होने को टालने की मांग की है।