देशभर में हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार देश में बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और टोल अपने आप कट जाएगा।
लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जून 2026 तक देश में सक्रिय FASTag यूजर्स की संख्या बढ़कर लगभग 6.23 करोड़ हो गई है। RFID तकनीक पर आधारित FASTag अब देश के अधिकांश वाहन मालिकों के लिए हाईवे यात्रा का अहम हिस्सा बन चुका है।
सरकार ने पिछले वर्ष कार, जीप और वैन जैसे गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए FASTag Annual Pass भी शुरू किया था। जून 2026 तक 77 लाख से अधिक Annual Pass जारी किए जा चुके हैं। इन पास के जरिए अब तक करीब 63 करोड़ टोल ट्रांजैक्शन किए जा चुके हैं। गैर-व्यावसायिक वाहनों की कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल ट्रांजैक्शन में Annual Pass की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस Annual Pass की कीमत 3,075 रुपये रखी गई है।
अब सरकार टोलिंग तकनीक के अगले चरण Multi-Lane Free Flow (MLFF) सिस्टम को लागू कर रही है। इस तकनीक में पारंपरिक टोल बूथ या बैरियर की आवश्यकता नहीं होगी। वाहन बिना रुके हाईवे से गुजरेंगे और टोल अपने आप कट जाएगा।
MLFF सिस्टम में FASTag, Automatic Number Plate Recognition (ANPR) कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से वाहन की पहचान की जाएगी और टोल शुल्क स्वचालित रूप से काट लिया जाएगा। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म होंगी, ईंधन की बचत होगी और यात्रा का समय भी कम लगेगा।
सरकार ने इस नई तकनीक के लिए 17 टोल प्लाजा को मंजूरी दी है, जिनमें से 5 टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम पहले ही लागू किया जा चुका है।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने यह भी बताया कि मौजूदा नियमों के अनुसार एक ही सड़क पर दो टोल प्लाजा के बीच सामान्य दूरी 60 किलोमीटर होती है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों और सड़क अवसंरचना की जरूरत के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि आने वाले समय में यह नई तकनीक देश के हाईवे नेटवर्क को अधिक तेज, आधुनिक और सुविधाजनक बनाएगी।