कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा जूडो खिलाड़ी और उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने इतिहास रच दिया है। महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी हेइडी क्वाच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतने वाली खिलाड़ी बन गई हैं।
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अस्मिता डे ने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया। उन्होंने कहा, “मैं यूपी पुलिस में हूं। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी। इस नौकरी ने मुझे आर्थिक सहारा दिया और उसी की बदौलत मैं यहां तक पहुंच सकी और देश के लिए गोल्ड मेडल जीत पाई।”
त्रिपुरा के बेलोनिया में 22 मार्च 2003 को जन्मी अस्मिता डे का सफर बेहद संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता अर्जुन कुमार डे साइकिल रिपेयर की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। शुरुआत में अस्मिता 800 मीटर दौड़ की खिलाड़ी थीं, लेकिन एक कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो की ओर कदम बढ़ाया और यही फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
उनकी शुरुआती ट्रेनिंग बेलोनिया में हुई, जिसके बाद उन्हें त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल और फिर स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के भोपाल केंद्र में प्रशिक्षण का मौका मिला। अनुभवी कोचों के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया।
साल 2022 में अस्मिता डे थाईलैंड में आयोजित एशियन कैडेट और जूनियर जूडो प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली त्रिपुरा की पहली जूडो खिलाड़ी बनीं। इसके बाद उन्होंने मकाऊ जूनियर एशिया कप में गोल्ड, कुवैत एशियन ओपन में सिल्वर और 2025 में मोरक्को के कैसाब्लांका अफ्रीकन ओपन में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी पहचान और मजबूत की।
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल में अस्मिता डे ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को गोल्डन स्कोर तक पहुंचाया और निर्णायक थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए लिखा कि अस्मिता डे ने पूरे देश का गौरव बढ़ाया है और उनकी यह सफलता देश की बेटियों के साहस, अनुशासन और मेहनत की प्रेरणादायक मिसाल है।
साइकिल रिपेयर की छोटी-सी दुकान से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स के सबसे ऊंचे पोडियम तक पहुंचने वाली अस्मिता डे की यह कहानी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। अब उनका अगला लक्ष्य देश के लिए ओलंपिक पदक जीतना है।