जयपुर: राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चाओं ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि इस बार चर्चा अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच नहीं, बल्कि अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच कथित मतभेदों को लेकर हो रही है।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब पूर्व कैबिनेट मंत्री और वागड़ के वरिष्ठ नेता महेंद्रजीत मालवीया अपने समर्थकों के साथ अशोक गहलोत से मिलने पहुंचे। मुलाकात के दौरान कार्यकर्ताओं ने “अशोक गहलोत चौथी बार” के नारे लगाए। बाद में जब यही कार्यकर्ता डोटासरा से मिले तो उन्होंने कथित तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी से ऊपर किसी व्यक्ति की ब्रांडिंग नहीं होनी चाहिए और व्यक्तिवाद ने पहले भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है।
अब इस पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह पहले से ही इन कार्यकर्ताओं को जयपुर आने से मना कर रहे थे और खुद बांसवाड़ा जाकर मिलने की बात कह रहे थे।
गहलोत ने कहा कि, “करीब 20-25 दिन से बात चल रही थी। मैं लगातार कह रहा था कि यहां आने की जरूरत नहीं है। मैं खुद बांसवाड़ा आऊंगा। लेकिन जब उन्होंने बार-बार आग्रह किया, तब मैंने मिलने के लिए हामी भरी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी तरह का सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम नहीं था। उनके मुताबिक, “वे सिर्फ कार्यकर्ता थे। जॉइनिंग नेताओं की होती है। न तो कोई औपचारिक जॉइनिंग हुई और न ही ऐसी कोई चर्चा हुई।”
कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान के सवाल पर गहलोत ने कहा कि मीडिया इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तूल दे रहा है। उन्होंने कहा, “हम सब एक हैं, एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाएंगे। न प्रदेश अध्यक्ष को कोई नाराजगी है और न मुझे।”
गहलोत ने आगे कहा कि कांग्रेस राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है और पार्टी में किसी तरह की अंदरूनी कलह नहीं है।