भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को पुणे में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लोकमान्य तिलक मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से प्रदान किया गया।
समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल को पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिन्ह, सम्मान राशि का चेक और ‘गीता रहस्य’ पुस्तक की प्रति भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार और कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
इस सम्मान के साथ अजीत डोभाल का नाम उन प्रतिष्ठित हस्तियों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें पहले यह पुरस्कार मिल चुका है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी जैसी हस्तियां शामिल हैं।
लोकमान्य तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक तिलक ने बताया कि अजीत डोभाल को राष्ट्र की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में उनके आजीवन साहसिक एवं असाधारण योगदान के लिए सर्वसम्मति से इस सम्मान के लिए चुना गया।
समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल के साथ अपनी पहली मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा कि जब वह गुजरात के गृह मंत्री थे, तभी उनकी मुलाकात डोभाल से हुई थी। शाह ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें अजीत डोभाल का योगदान स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि डोभाल ने 1972 से अब तक देश की सुरक्षा, विदेश नीति और सशस्त्र बलों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अजीत डोभाल ने सम्मान स्वीकार करते हुए कहा कि लोकमान्य तिलक के आदर्श आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि तिलक ने राष्ट्रवाद की भावना को नई दिशा दी और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिया। उन्होंने इस सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हुए इसे देश की सेवा करने वाले सभी लोगों के नाम समर्पित बताया।
उत्तराखंड मूल के 1968 बैच के केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। अपने करियर में उन्होंने पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन, मिजोरम शांति प्रक्रिया और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाई। वह ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित होने वाले देश के पहले पुलिस अधिकारी भी हैं।