भारतीय विज्ञापन जगत के प्रमुख चेहरे और ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के रचनाकार पीयूष पांडे का गुरुवार को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि संक्रमण के कारण उनका निधन हुआ। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार शनिवार सुबह 11 बजे शिवाजी पार्क श्मशान घाट में होगा।
जयपुर में जन्मे और पले-बढ़े पांडे का सफर क्रिकेट से शुरू हुआ, उन्होंने रणजी ट्रॉफी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1982 में ओगिल्वी इंडिया से जुड़कर भारतीय विज्ञापन जगत की दिशा बदल दी। अगले चार दशकों में, पांडे ने न केवल बड़े-बड़े अभियान बनाए, बल्कि विज्ञापन में एक नई भाषा भी गढ़ी, जो सरल, बोलचाल की हिंदी और रोज़मर्रा के जीवन से प्रेरित थी।
उनके अविस्मरणीय अभियानों में शामिल हैं:
कैडबरी डेरी मिल्क: ‘कुछ खास है’
फेविकोल: ‘फेविकोल का जोड़’
एशियन पेंट्स: ‘हर घर कुछ कहता है’
गूगल इंडिया: ‘रीयूनियन’
वोडाफोन, पॉन्ड्स और पोलियो जागरूकता अभियान: ‘दो बूंद ज़िंदगी की’
पांडे का मानना था, “भारत का दिल उसके छोटे शहरों में धड़कता है,” और उनके काम में यह विश्वास झलकता था। 1980 के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने राष्ट्रीय एकता गान ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ लिखा और गाया, जो भारतीय संस्कृति का एक निर्णायक क्षण बन गया।
पीयूष पांडे ने अपने करियर में कई सम्मान प्राप्त किए, जिनमें 2016 में पद्मश्री और 2024 में एलआईए लीजेंड पुरस्कार शामिल हैं। 2019 में उन्हें ओगिल्वी में मुख्य रचनात्मक अधिकारी और भारत में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, जबकि 2024 में उन्होंने मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला।
उनकी ज़मीन से जुड़ी और मानवीय दृष्टि ने भारतीय विज्ञापन को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उनके अभियान आज भी भारतीय जनता के दिलों में जीवित हैं, और उनके योगदान ने विज्ञापन जगत को रचनात्मक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया।