छठ पर्व, जिसे सूर्य उपासना का महापर्व कहा जाता है, आज देशभर में बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व विशेष रूप से बिहार , झारखंड , उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यधिक श्रद्धा से मनाया जाता है, लेकिन अब इसकी गूंज पूरे भारत और विदेशों तक पहुंच चुकी है। छठ पूजा में भगवान सूर्य ( अस्ताचल और उदयमान ) तथा छठी मैया की पूजा की जाती है, जिनसे आरोग्य, समृद्धि और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।
चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत नहाय – खाए से होती है, जिसमें व्रती शुद्धता और पवित्रता का पालन करते हुए स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद खरना के दिन उपवास रखा जाता है और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनाकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। तीसरे दिन यानी संध्या अर्ध्य पर व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, वहीं चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्ध्य देने के साथ पर्व का समापन होता है। इस दौरान घाटों पर भक्ति गीत, लोक संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के साथ भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। बिहार के पटना, गया, औरंगाबाद और भागलपुर में गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए हैं। उत्तर प्रदेश में वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ के घाटों पर भी श्रद्धालु सूर्योपासना में लीन हैं। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में भी प्रवासी बिहारियों ने छठ घाट बनाकर पूजा का आयोजन किया है। प्रशासन द्वारा घाटों की सुरक्षा, स्वच्छता और रोशनी के खास इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
छठ पूजा भारतीय संस्कृति का वह पर्व है, जो संयम , पवित्रता और सूर्य उपासना का अद्भुत संगम है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश भी देता है। आज जब देश के हर कोने में छठ गीत गूंज रहे हैं और घाटों पर आस्था का सागर उमड़ा है । छठ अब केवल एक पर्व नहीं रहा , बल्कि भारतीय समाज की आध्यात्मिक एकता की पहचान बन चुका है।