छठ पूजा से चमकेगी अर्थव्यवस्था: 38,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान, बाजारों में उमड़ा श्रद्धा और स्वदेशी का संगम

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सूर्य उपासना और स्वच्छता का पर्व छठ पूजा इस बार केवल आस्था का नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का भी प्रतीक बन गया है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस वर्ष 38,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने की संभावना है — जो पिछले वर्ष के 31,000 करोड़ रुपये से लगभग 7,000 करोड़ रुपये अधिक है। 2023 में जहां यह व्यापार 27,000 करोड़ था, वहीं अब लगातार तीसरे साल इसमें बड़ी छलांग देखने को मिल रही है। दिल्ली, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अब दक्षिण भारत और महानगरों में भी इस पर्व की धूम देखी जा रही है।

चार दिवसीय पर्व, करोड़ों की आस्था और अरबों का व्यापार

25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025 तक चलने वाली यह पूजा लगभग 15 करोड़ श्रद्धालुओं को जोड़ने वाली सबसे बड़ी जनआस्था है।
चार दिनों के पारंपरिक क्रम — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य — के लिए देशभर के बाजारों में खरीदारी का माहौल चरम पर है।

दिल्ली के प्रमुख बाजारों जैसे चांदनी चौक, लाजपत नगर, लक्ष्मीनगर, और द्वारका में सुप, दौरा, डलिया, बांस की टोकरियां, मिट्टी के दीये, फल, गन्ना, धान्य और सब्जियां खूब बिक रही हैं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार,

“छठ पूजा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वदेशी उत्पादों की सबसे बड़ी मार्केट ड्राइव बन चुकी है। स्थानीय कारीगरों, छोटे उद्योगों और किसानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।”

स्वदेशी उत्पादों की मांग ने बढ़ाई रौनक

त्योहार के इस मौसम में कपड़ा बाजारों में भी बिक्री में जोरदार उछाल देखने को मिला है। महिलाओं के लिए साड़ियां, लहंगा-चुन्नी, सलवार-कुर्ता, और पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा, धोती की मांग बढ़ गई है। ये सभी खरीदारी ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बल दे रही हैं। विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, और मेट्रो शहरों के बाजारों में स्थानीय निर्मित वस्त्रों, मिठाइयों, और पूजा सामग्री की भारी बिक्री हो रही है।

कृषि, हस्तशिल्प और पर्यटन को भी मिला बूस्ट

छठ पूजा के अवसर पर केवल खुदरा व्यापार ही नहीं, बल्कि कृषि, बागवानी, हस्तशिल्प और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिला है।
फलों, अनाजों और सब्जियों की बढ़ती मांग ने किसानों की आमदनी में इजाफा किया है, वहीं घाटों की सजावट, सफाई और परिवहन सेवाओं से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। दिल्ली सरकार ने यमुना तट, द्वारका, मयूर विहार, रोहिणी और नजफगढ़ जैसे क्षेत्रों में सैकड़ों घाटों पर विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पोचनपुर घाट का निरीक्षण कर तैयारी की समीक्षा की और श्रद्धालुओं को सुविधा देने का आश्वासन दिया।

कैट रिपोर्ट: छठ पूजा का व्यापार पाकिस्तान के रक्षा बजट के आधे के बराबर

कैट की रिपोर्ट के मुताबिक, “इस बार छठ पूजा का कुल अनुमानित कारोबार 38,000 करोड़ रुपये है, जो पाकिस्तान के रक्षा बजट (लगभग 76,000 करोड़ रुपये) के आधे के बराबर है।” यह तुलना बताती है कि भारतीय सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था (Cultural Economy) कितनी विशाल और प्रभावशाली हो चुकी है। सिर्फ दिल्ली में ही लगभग 6,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है।
यह त्योहार अब केवल बिहार-झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारत में राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

पर्यावरण और नकली उत्पादों की चुनौती

हालांकि इस आर्थिक रौनक के बीच चुनौतियां भी हैं।
कुछ जगहों पर नकली या प्लास्टिक सामग्री, और प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुएं बाजार में आ रही हैं।
पर्यावरणविदों ने अपील की है कि श्रद्धालु प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्रियों का उपयोग करें, जिससे गंगा-यमुना और अन्य नदियों की स्वच्छता बनी रहे।

छठ पूजा: आर्थिक समृद्धि और सामाजिक एकता का पर्व

छठ केवल सूर्य उपासना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला उत्सव है।
देश और विदेशों में बसे बिहारी और पूर्वांचली समुदाय इस पर्व से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं।
यह पर्व सामाजिक समरसता, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता का संदेश देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार,

“छठ पूजा जैसे धार्मिक आयोजन भारतीय GDP में अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा योगदान देते हैं, ठीक उसी तरह जैसे कुंभ और गणेशोत्सव।”

जैसे-जैसे अर्घ्य का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बाजारों की चमक और श्रद्धा का उत्साह दोनों चरम पर पहुंच गए हैं।

निष्कर्ष: छठ पूजा बनी सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की नई शक्ति

छठ पूजा भारतीय परंपरा, श्रम और बाजार की एक ऐसी अद्भुत मिसाल है, जहां आस्था और अर्थव्यवस्था साथ-साथ चलते हैं।
यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि रोजगार, व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

इस बार का 38,000 करोड़ रुपये का कारोबार यह साबित करता है कि छठ पूजा अब केवल पूजा नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का उत्सव बन चुकी है।

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