बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देवार्क सूर्य मंदिर, सूर्य उपासना का एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध स्थल है। यह मंदिर न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि धार्मिक आस्था का भी एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सूर्य देव की आराधना के लिए किया गया था, और इसकी वास्तुकला में गुप्त तथा पाल कालीन शैली की झलक दिखाई देती है। मंदिर परिसर में मुख्य रूप से सूर्य देव की प्रतिमा स्थापित है, जो अपने रथ पर सवार हैं और सात घोड़ों के साथ चित्रित की गई है, जो प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के प्रतीक हैं।
छठ पर्व के दौरान यह मंदिर श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। विशेष रूप से सूर्य अर्घ्य के समय मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भव्य और अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है। श्रद्धालु उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।
देवार्क सूर्य मंदिर के निकट एक सुंदर सूर्य कुंड भी स्थित है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालु इस कुंड में स्नान करके पूजा-अर्चना करते हैं। कहा जाता है कि इस कुंड का जल औषधीय गुणों से युक्त है और त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति दिलाता है। छठ पर्व के अवसर पर इस स्थान पर मेलों का आयोजन भी होता है, जहां धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियाँ चरम पर होती हैं।
देवार्क सूर्य मंदिर न केवल छठ पूजा का केंद्र है, बल्कि बिहार की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। यहां आकर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम अनुभव करते हैं।