हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को आने वाला यह पावन व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव को सौंप देते हैं। इसके बाद देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु पुनः जागृत होते हैं।
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार इस व्रत का पूर्ण पुण्य तभी मिलता है जब पूजा के दौरान देवशयनी एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ भी किया जाए।
देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, प्रातः 09:12 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, प्रातः 11:34 बजे
- व्रत तिथि: 25 जुलाई 2026 (शनिवार)
- पारण का समय: 26 जुलाई 2026 (रविवार), प्रातः 05:39 बजे से 08:22 बजे तक
देवशयनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवर्षि नारद ने ब्रह्माजी से एकादशी व्रत की महिमा जानने की इच्छा व्यक्त की। तब ब्रह्माजी ने सत्ययुग के धर्मात्मा राजा मांधाता की कथा सुनाई।
राजा मांधाता के राज्य में प्रजा सुखी और समृद्ध थी, लेकिन एक समय ऐसा आया जब लगातार तीन वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। पूरे राज्य में भीषण अकाल पड़ गया। अन्न और जल की भारी कमी के कारण यज्ञ, हवन, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान भी बंद होने लगे। दुखी प्रजा राजा के पास पहुंची और अपनी पीड़ा सुनाई।
प्रजा की व्यथा सुनकर राजा मांधाता स्वयं कारण जानने के लिए वन में ऋषियों के आश्रमों की ओर निकल पड़े। वहां उनकी भेंट महर्षि अंगिरा से हुई। राजा ने उनसे पूछा कि धर्मपूर्वक शासन करने के बावजूद उनके राज्य में इतना बड़ा संकट क्यों आया।
महर्षि अंगिरा ने बताया कि सत्ययुग में धर्म का अत्यधिक प्रभाव था और छोटे से छोटा अधर्म भी बड़ा परिणाम देता था। उन्होंने राजा को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करने और राज्य की समस्त प्रजा से भी यह व्रत करवाने की सलाह दी।
राजा मांधाता ने महर्षि के निर्देशानुसार स्वयं व्रत रखा और पूरे राज्य में भी एकादशी का पालन कराया। भगवान विष्णु की कृपा से शीघ्र ही वर्षा हुई, अकाल समाप्त हो गया और राज्य में फिर से सुख, शांति और समृद्धि लौट आई।
इसी कारण देवशयनी एकादशी को अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करने तथा इसकी कथा सुनने या पढ़ने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। आस्था और परंपरा के अनुसार इसका पालन किया जाता है।