नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनोज गौड़ को मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी कंपनी के खिलाफ चल रही जांच के तहत हुई, जिसमें बैंक धोखाधड़ी और फंड्स के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। ईडी की टीम ने गुरुवार को नोएडा स्थित जेपी इंफ्राटेक के कार्यालय और मनोज गौड़ के निवास पर छापेमारी की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। यह मामला येस बैंक के पूर्व एमडी राणा कपूर से जुड़े कथित ऋण घोटाले से भी लिंक है, जहां जेपी ग्रुप पर अनियमितताओं का आरोप है।जेपी इंफ्राटेक एक प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी है, जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे जेपी विश टाउन और जेपी स्पोर्ट्स सिटी के लिए जानी जाती है। कंपनी पर हजारों होमबायर्स के पैसे डूबने का आरोप है, क्योंकि कई प्रोजेक्ट्स वर्षों से अधर में लटके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कंपनी दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है, और सूर्या ग्रुप ने इसे अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू की है। ईडी का दावा है कि मनोज गौड़ और उनके परिवार ने कंपनी के फंड्स को व्यक्तिगत लाभ के लिए डायवर्ट किया, जिसमें विदेशी खातों में ट्रांसफर और शेल कंपनियों का इस्तेमाल शामिल है। जांच एजेंसी ने पहले ही जेपी ग्रुप के कई अधिकारियों से पूछताछ की थी।गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया। होमबायर्स एसोसिएशन ने इसे न्याय की दिशा में कदम बताया, क्योंकि हजारों परिवार वर्षों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। जेपी विश टाउन के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “यह गिरफ्तारी लंबे समय से चले आ रहे अन्याय का अंत हो सकती है। हमारी जमा राशि कहां गई, इसका जवाब मिलना चाहिए।” दूसरी ओर, जेपी ग्रुप के प्रवक्ता ने गिरफ्तारी को गलत बताया और कहा कि कंपनी सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रही है। उन्होंने कोर्ट में चुनौती देने की बात कही।यह मामला 2017 से चल रहा है, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने का आदेश दिया था। आईडीबीआई बैंक ने कंपनी पर 526 करोड़ रुपये का डिफॉल्ट करने का आरोप लगाया था। इसके बाद एनसीएलटी ने दिवालिया प्रक्रिया शुरू की। ईडी ने पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत केस दर्ज किया, जिसमें दावा किया गया कि जेपी ग्रुप ने बैंकों से लिए गए ऋणों को गलत तरीके से इस्तेमाल किया। राणा कपूर केस में भी जेपी ग्रुप का नाम आया, जहां कथित तौर पर रिश्वत के बदले अनुचित ऋण दिए गए। ईडी ने अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की हैं, जिसमें दिल्ली, नोएडा और विदेशी संपत्तियां शामिल हैं।मनोज गौड़ जेपी ग्रुप के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ के बेटे हैं और कंपनी के प्रमुख चेहरों में से एक। उनकी गिरफ्तारी से ग्रुप की छवि पर बट्टा लगा है। ईडी उन्हें शुक्रवार को दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में पेश करेगी, जहां रिमांड की मांग की जाएगी। जांच में डिजिटल रिकॉर्ड्स, बैंक स्टेटमेंट्स और विदेशी ट्रांजेक्शंस की जांच हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने का माध्यम बनेगा।होमबायर्स की पीड़ा लंबी है। नोएडा में हजारों परिवार किराए पर रहने को मजबूर हैं, जबकि उनकी जमा राशि करोड़ों में है। सरकार ने रेरा एक्ट लागू किया, लेकिन पुराने केस अभी भी लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में होमबायर्स को प्राथमिकता देने का आदेश दिया है। ईडी की कार्रवाई से उम्मीद है कि फंड्स की रिकवरी हो सकेगी।यह गिरफ्तारी कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठाती है। बैंकों के एनपीए बढ़ने का एक कारण रियल एस्टेट फ्रॉड हैं। आरबीआई ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन अमल में कमी है। जेपी केस अन्य डेवलपर्स के लिए सबक है।कुल मिलाकर, मनोज गौड़ की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ ईडी की मुहिम का हिस्सा है। जांच आगे बढ़ेगी और सच सामने आएगा। होमबायर्स को न्याय मिले, यही उम्मीद है।