स्मृति शेष: भारतीय कॉमिक्स के जनक ‘प्राण,’ जिनके गढ़े किरदार ‘चाचा चौधरी’ और ‘साबू’ बेमिसाल

83 0

प्राण के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना गया. ‘वर्ल्ड एन्साइक्लोपीडिया ऑफ कॉमिक्स’ के संपादक मौरिस हॉर्न ने उन्हें ‘भारत का वॉल्ट डिज़्नी’ कहा. 2001 में उन्हें पहले कॉमिक्स कन्वेंशन में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला

Chacha Chowdhary : भारतीय कॉमिक्स को भारतीय रंग, भावनाएं और जमीनी किरदार देने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह नाम है प्राण कुमार शर्मा का. उन्हें हम सभी प्यार से ‘प्राण’ के नाम से जानते हैं। 6 अगस्त 2014 को उनका निधन हुआ था, लेकिन उनके गढ़े किरदार आज भी लाखों दिलों में जिंदा हैं. चाचा चौधरी, साबू, पिंकी, बिल्लू, और श्रीमतीजी जैसे किरदार केवल कॉमिक्स के पन्नों में नहीं रहते; वे हर भारतीय बच्चे की याद, उनकी हंसी और सोच में बसे हुए हैं प्राण को ‘भारतीय कॉमिक्स का जनक’ कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने 1960 के दशक में वो किया जो तब कोई सोच भी नहीं सकता था विदेशी कार्टूनों के दौर में एक पूरी तरह देसी दुनिया रच दी, जिसमें भारतीय किरदार, भारतीय हालात और हमारी जमीन की सच्चाइयां थीं।

जन्म और पढ़ाई

प्राण का जन्म 15 अगस्त 1938 को हुआ था, तब भारत आजाद नहीं हुआ था और न ही भारतीय कॉमिक्स का कोई अस्तित्व था। बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया। प्राण ने अपनी कला में भारतीय समाज की धड़कनों को महसूस किया और उसी को चित्रों में ढालना शुरू किया। उन्होंने मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से फाइन आर्ट्स में शिक्षा ली, लेकिन असली शिक्षा उन्होंने जनता से ली, उस भारतीय मध्यमवर्ग से जो उनके हर किरदार में झलकता है। 1969 में ‘लोटपोट’ पत्रिका में चाचा चौधरी का जन्म हुआ और देखते ही देखते यह किरदार भारतीय बच्चों का हीरो बन गया। ‘चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से तेज’ था, लेकिन उसका दिल हर भारतीय बुज़ुर्ग जैसा ही था।

प्राण ने सिर्फ बच्चों का मनोरंजन नहीं किया, उन्होंने समाज को एक आईना भी दिखाया। उनके कॉमिक्स में हास्य तो होता ही था, लेकिन साथ में एक सामाजिक संदेश भी छिपा होता था. उनकी कहानियां ईमानदारी, समझदारी और मानवीय मूल्यों की बात करती थीं। यही वजह है कि उनके कॉमिक्स ना सिर्फ बच्चों, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी लोकप्रिय थे। उनके बनाए किरदारों में से साबू, जो जुपिटर ग्रह से आया एक विशालकाय दोस्त था, आज भी चाचा चौधरी की कहानियों में ताकत और सच्चाई का प्रतीक है। वहीं पिंकी और बिल्लू जैसे किरदार बच्चों की शरारतों और मासूमियत को दर्शाते हैं।

भारत का वॉल्ट डिज़्नी’

प्राण के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना गया। ‘वर्ल्ड एन्साइक्लोपीडिया ऑफ कॉमिक्स’ के संपादक मौरिस हॉर्न ने उन्हें ‘भारत का वॉल्ट डिज़्नी’ कहा। 2001 में उन्हें पहले कॉमिक्स कन्वेंशन में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। 2014 में उनके सम्मान में गूगल ने एक विशेष डूडल जारी किया, यह दिखाने के लिए कि भारतीय जनमानस में उनकी क्या जगह है। उन्होंने 500 से अधिक कॉमिक्स बनाए और उनके किरदार आज भी 10 से अधिक भाषाओं में पढ़े जाते हैं।

उनका बनाया पहला भारतीय कॉमिक-बेस्ड टीवी शो ‘चाचा चौधरी’ 600 एपिसोड तक सहारा वन चैनल पर प्रसारित हुआ, जो इस बात का सबूत है कि भारतीय कहानियां, भारतीय हीरो और देसी हास्य भी उतने ही लोकप्रिय हो सकते हैं जितना कोई विदेशी सुपरहीरो. उन्होंने अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, कोरिया और चीन जैसे देशों में जाकर व्याख्यान भी दिए, जिससे यह साफ है कि उनकी कला सिर्फ भारतीय नहीं, वैश्विक थी।

Related Post

46 साल बाद भी अमर है ‘कर्ज’ का गिटार म्यूजिक, जानिए कौन थे ‘एक हसीना थी’ की धुन के पीछे के जादूगर

Posted by - June 15, 2026 0
हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शुमार Karz को रिलीज हुए 46 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके गाने और…

दुबई में शाहरुख खान ने नाम पर बना रहा हाउसिंग प्रोजेक्ट, किंग खान बोले- बच्चों से कहूंगा, देखो पापा की बिल्डिंग…

Posted by - November 15, 2025 0
दुबई की एक रियल एस्टेट कंपनी ने हाल ही में घोषणा की है कि वे एक टावर बनाने की योजना…

2 साल की उम्र में बनी थीं ‘कान्हा’, 17 साल बाद इतनी बदल गईं ‘जय श्री कृष्णा’ की धृति भाटिया, फैंस भी रह गए हैरान

Posted by - June 20, 2026 0
टीवी के लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक Jai Shri Krishna में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का किरदार निभाकर करोड़ों दर्शकों का…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *