कुआलालंपुर में शुरू हुई उच्च-स्तरीय चर्चा, दुर्लभ मिट्टी और टैरिफ पर बन सकती है सहमति विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक नई पहल हुई है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में शनिवार से शुरू हुई द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अगले सप्ताह दक्षिण कोरिया में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए आधार तैयार किया है। ये वार्ताएं आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन के दौरान साइडलाइन पर हो रही हैं, जहाँ अमेरिका की ओर से वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर शामिल हैं। चीन की तरफ से उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग इन वार्ताओं का नेतृत्व कर रहे हैं।

दुर्लभ मिट्टी निर्यात विवाद बना प्रमुख मुद्दा
यह वार्ता ऐसे समय पर हो रही है जब हाल ही में चीन ने रेयर अर्थ (दुर्लभ मिट्टी) के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं। अब किसी भी शिपमेंट के लिए सरकारी अनुमति और उपयोग की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम अमेरिका के तकनीकी निर्यात प्रतिबंधों के जवाब में देखा जा रहा है।
दुर्लभ मिट्टी तत्व — जैसे लैंथेनम और नियोडिमियम — इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों के निर्माण में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
चीन इन तत्वों की वैश्विक आपूर्ति का 80% से अधिक नियंत्रित करता है, जिससे यह विवाद वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के इन कदमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि “यदि बीजिंग व्यापार में बाधाएँ डालता है, तो अमेरिका चीनी सामानों पर 100% तक नए टैरिफ लगाने से पीछे नहीं हटेगा।” हालाँकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात “रद्द करने का कोई कारण नहीं है।”
इससे संकेत मिला कि दोनों पक्ष तनाव घटाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

31 अक्टूबर से दक्षिण कोरिया में ट्रंप-शी शिखर बैठक
दोनों नेताओं की बहुप्रतीक्षित मुलाकात 31 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर में होने वाली है। यह बैठक एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) फोरम के साइडलाइन पर आयोजित की जाएगी। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली एशिया यात्रा है, जिसमें मलेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि वे शी जिनपिंग से “व्यापक मुद्दों” पर बात करेंगे — जिनमें शामिल हैं:
व्यापार समझौते,
सोयाबीन और कृषि उत्पादों की खरीद,
फेंटेनिल तस्करी,
ताइवान प्रश्न,
और यहाँ तक कि रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति की संभावनाएँ। ट्रंप ने आशा जताई कि यह “तेजी से और सफल समझौता” होगा, जिसमें चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाना और परमाणु हथियारों पर सीमा तय करना शामिल हो सकता है।
2020 का ‘फेज-1 ट्रेड डील’ फिर चर्चा में
इन चर्चाओं की पृष्ठभूमि में 2020 का चरण-1 व्यापार समझौता (Phase-1 Deal) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस समझौते में चीन ने अमेरिकी उत्पादों की 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त खरीद का वादा किया था। लेकिन कोविड-19 महामारी और व्यापारिक टकरावों के कारण यह लक्ष्य कभी पूरा नहीं हुआ।
अब अमेरिकी प्रशासन ने उस समझौते की अनुपालन जांच (Compliance Review) शुरू की है, जो आने वाले टैरिफ निर्णयों का आधार बन सकती है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने सोयाबीन और ऊर्जा की खरीद में वादा तोड़ा, जबकि चीन का कहना है कि अमेरिका के तकनीकी निर्यात प्रतिबंधों ने व्यापार को प्रभावित किया। कुआलालंपुर वार्ताओं में दोनों पक्ष इन विवादों पर अंतरिम समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें दुर्लभ मिट्टी के निर्यात पर रियायतें और टैरिफ में आंशिक छूट शामिल हो सकती है।
वैश्विक असर और विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि इन वार्ताओं का असर केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।
एटलांटिक काउंसिल के वरिष्ठ विश्लेषक डेक्टर टिफ रॉबर्ट्स का कहना है — “यह एक शक्ति प्रदर्शन (Power Play) है। चीन अपने संसाधनों की ताकत का उपयोग कर रहा है, जबकि अमेरिका राजनीतिक दबाव की रणनीति अपना रहा है।”
वहीं अमेरिकी अर्थशास्त्री वेलोर पीश ने कहा कि “टैरिफ की धमकियाँ स्थायी समाधान नहीं हैं। दोनों देशों को तकनीकी और रणनीतिक संसाधनों पर भरोसे का ढाँचा बनाना होगा।” कई विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि यह बैठक सफल रही, तो यह टिकटॉक और तकनीकी विवादों की तरह “सीमित लेकिन व्यावहारिक सफलता” साबित हो सकती है। लेकिन अगर यह असफल रही, तो एक नए व्यापार युद्ध की शुरुआत हो सकती है, जो वैश्विक सप्लाई चेन और विनिर्माण क्षेत्र को गहराई से प्रभावित करेगा।
ट्रंप-शी संवाद और मलेशिया की मध्यस्थ भूमिका
ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बताया कि सितंबर में शी जिनपिंग के साथ उनकी “उत्पादक फोन कॉल” हुई थी, जिसमें दोनों नेताओं ने “संवाद बनाए रखने की सहमति” जताई थी। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भी इन वार्ताओं में मध्यस्थ भूमिका निभा रहे हैं, और उनकी ट्रंप से आसियान सम्मेलन के दौरान विशेष मुलाकात प्रस्तावित है। यह कदम दक्षिण-पूर्व एशिया को अमेरिकी कूटनीति के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है।
नाजुक संतुलन पर खड़े संबंध
अमेरिका और चीन के रिश्ते इस समय एक नाजुक मोड़ पर हैं — जहाँ दोनों देश न तो पूरी तरह टकराव चाहते हैं और न ही पूरी तरह समझौता करने को तैयार हैं। कुआलालंपुर की यह वार्ता इस संतुलन की परीक्षा होगी। यदि ट्रंप-शी बैठक सफल रही, तो वैश्विक बाजारों में स्थिरता और निवेश में नई ऊर्जा देखी जा सकती है। लेकिन यदि बैठक रद्द हुई या विवाद बढ़ा, तो तेल, चिप्स और दुर्लभ धातुओं की कीमतों में अस्थिरता बढ़ेगी। दुनिया की निगाहें अब दक्षिण कोरिया पर हैं — जहाँ शायद इतिहास एक बार फिर “ट्रंप शैली” में लिखा जाने वाला है।