नई दिल्ली: तकनीकी दुनिया में एक और बड़ा “मूनशॉट” सामने आया है। गूगल ने अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। इस पहल का मकसद सौर ऊर्जा से चलने वाले उपग्रहों के नेटवर्क के माध्यम से एआई कंप्यूटिंग को तेज़ और अधिक स्थायी बनाना है।
कुछ साल पहले, तकनीकी कंपनियों ने एआई डेटा सेंटरों के विशाल नेटवर्क बनाने का सपना देखा था। लेकिन ऊर्जा की अत्यधिक खपत, जल उपयोग और कार्बन उत्सर्जन जैसी चुनौतियों ने इस योजना को जमीनी स्तर पर कठिन बना दिया। गूगल, जेफ बेजोस, एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन जैसे अरबपतियों के नक्शेकदम पर चलते हुए, अब इसे अंतरिक्ष में ले जाने की योजना बना रहा है।
प्रोजेक्ट सनकैचर क्या है?
गूगल का यह शोध पहल सौर ऊर्जा से चलने वाले उपग्रहों का समूह बनाने पर केंद्रित है, जो अंतरिक्ष में डेटा केंद्रों की मेजबानी कर सकते हैं। यह नेटवर्क स्टारलिंक जैसी तकनीक से प्रेरित है, लेकिन इसका उद्देश्य उच्च-प्रदर्शन TPU (ट्रांजिस्टर प्रोसेसिंग यूनिट) और AI त्वरकों को कक्षा में स्थापित करना है।
गूगल के अनुसार, सही कक्षा में सौर पैनल पृथ्वी की तुलना में 8 गुना अधिक उत्पादक हो सकते हैं और लगातार बिजली प्रदान कर सकते हैं। उपग्रहों को मुक्त-स्थान ऑप्टिकल लिंक से जोड़कर तेज़ और स्केलेबल डेटा नेटवर्क बनाया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष आधारित एआई डेटा केंद्र संभव होंगे।

मुख्य चुनौतियाँ
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उच्च गति संचार: उपग्रहों के बीच डेटा ट्रांसफर प्रति सेकंड दसियों टेराबिट की गति से होना चाहिए।
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ऊर्जा और सौर पैनल दक्षता: पृथ्वी पर ऊर्जा लागत अधिक है, जबकि अंतरिक्ष में सौर पैनल प्रभावी समाधान हैं।
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उपग्रह की दूरी और स्थायित्व: उपग्रहों को सैकड़ों मीटर की दूरी पर रखते हुए सटीक नियंत्रण आवश्यक है।
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हार्डवेयर सुरक्षा: तापमान, विकिरण और अंतरिक्ष मलबे से सुरक्षा। गूगल ने TPU v6e चिप्स का विकिरण परीक्षण सफलतापूर्वक किया है।
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ठंडा करना और शीतलन: गुरुत्वाकर्षण की कमी में पारंपरिक शीतलन प्रणाली काम नहीं करती।
भविष्य की योजना
गूगल 2027 तक दो प्रोटोटाइप उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहा है। हालांकि शुरुआती लॉन्च लागत अधिक होगी, लेकिन 2030 के दशक तक लागत घटकर $200 प्रति किलोग्राम होने की संभावना है।
एआई और जनरेटिव मॉडल्स की बढ़ती मांग के कारण डेटा केंद्रों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। पृथ्वी पर नए डेटा केंद्रों के लिए उपयुक्त जगह ढूँढ़ना कठिन है, और स्थानीय नियम अक्सर बाधा बनते हैं। इसके चलते अंतरिक्ष आधारित डेटा सेंटर ऊर्जा कुशल, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बन सकते हैं।