नई दिल्ली, 1 नवंबर 2025: प्रकृति के रहस्यों को उजागर करने वाली एक नई वैज्ञानिक खोज ने मकड़ियों के जालों को नई दृष्टि से देखने पर मजबूर कर दिया है। स्वीडन की कृषि विश्वविद्यालय के भौतिकशास्त्री गैब्रिएले ग्रेको और उनकी टीम ने पाया है कि मकड़ियों के जालों में मौजूद ‘स्टेबिलिमेंटा’ नामक सजावटी संरचनाएं वास्तव में शिकार का पता लगाने में सहायक होती हैं। यह अध्ययन ‘पीएलओएस वन’ जर्नल में 29 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित हुआ है।
मकड़ियां, विशेष रूप से ऑर्ब-वीवर प्रजाति जैसे आर्गियोपे ब्रुएनिची (वास्प स्पाइडर), चक्राकार जाल बुनती हैं जो उड़ते शिकार को फंसाने के लिए बनाए जाते हैं। इन जालों में कभी-कभी जिग-जैग आकार की धागों या केंद्र में गोलाकार पैटर्न जैसी सजावटें दिखाई देती हैं जिन्हें स्टेबिलिमेंटा कहा जाता है। अब तक वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर बहस थी कि ये संरचनाएं केवल सजावट हैं या इनका कोई व्यावहारिक उद्देश्य भी है।
ग्रेको की टीम ने इटली के सार्डिनिया क्षेत्र में मकड़ियों के जालों का अध्ययन कर यह रहस्य सुलझाया। उन्होंने कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह दिखाया कि स्टेबिलिमेंटा जाल में कंपन (vibrations) के प्रसार को बढ़ाते हैं, जिससे मकड़ी को शिकार की दिशा और दूरी का पता लगाने में मदद मिलती है। विशेष रूप से जब कंपन जाल की स्पाइरल धागों के समानांतर चलते हैं, तो ये सजावटें उन्हें तेजी से फैलाती हैं और अधिक संवेदनशील डिटेक्शन पॉइंट्स तक पहुंचाती हैं।
यह खोज मकड़ियों की अद्भुत संवेदी प्रणाली को समझने में ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और तकनीक के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलती है। शोधकर्ता मानते हैं कि स्टेबिलिमेंटा जैसी प्राकृतिक संरचनाएं वाइब्रेशन सेंसर, रोबोटिक टच सिस्टम और मेडिकल उपकरणों के डिजाइन में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकती हैं।
गैब्रिएले ग्रेको के शब्दों में,
“मकड़ी के जालों में ये सजावटी संरचनाएं केवल सौंदर्य नहीं बढ़ातीं, बल्कि वे प्रकृति की सूक्ष्म इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।”
यह खोज दर्शाती है कि प्रकृति में सुंदरता और कार्यक्षमता साथ-साथ विकसित होती हैं, और मकड़ियों के जाल भविष्य की वैज्ञानिक नवाचारों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकते हैं।