ब्रुसेल्स में भारत-EU व्यापार वार्ता को नई दिशा देंगे पीयूष गोयल

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को गति देने के प्रयासों को नया मोड़ देने के लिए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दो दिवसीय ब्रुसेल्स दौरे पर पहुंचे हैं। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब इस समझौते को अंतिम रूप देने की समयसीमा नजदीक आ चुकी है और दोनों पक्ष व्यापारिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने के लिए गंभीर हैं।

वाणिज्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि पीयूष गोयल इस दौरे में ईयू के कार्यकारी उपाध्यक्ष और व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक से मुलाकात करेंगे। बैठक का उद्देश्य वार्ता को राजनीतिक प्रोत्साहन देना और अब तक की प्रगति की समीक्षा करना है। इसके अलावा, दोनों नेता उन बिंदुओं की पहचान करेंगे, जिन पर अब भी सहमति बनना बाकी है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर वार्ता वर्ष 2022 में फिर से शुरू हुई थी, जिसे पहले 2013 में निलंबित कर दिया गया था। अब दोनों पक्ष बाजार पहुंच, शुल्क-मुक्त व्यापार, निवेश सहयोग, डिजिटल व्यापार, पर्यावरण मानक, और भौगोलिक संकेतों (GI tags) जैसे मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते के तहत भारत को यूरोपीय बाजारों में निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश और उत्पादन सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं मिलेंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-EU व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए “विन-विन डील” साबित हो सकता है। वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वार्षिक व्यापार 155 अरब डॉलर से अधिक का है। यदि FTA लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा 200 अरब डॉलर को पार कर सकता है। यह समझौता विशेष रूप से टेक्सटाइल्स, फार्मा, आईटी, ऑटो पार्ट्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए लाभदायक होगा।

पीयूष गोयल ने अपने हालिया बयान में कहा था कि भारत अब “न्यायसंगत और पारस्परिक लाभ वाले व्यापार समझौतों” पर ध्यान दे रहा है। उनका कहना है कि भारत किसी भी समझौते में अपनी घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और निर्यात प्रतिस्पर्धा दोनों को प्राथमिकता देगा। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ का ध्यान सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और श्रम मानकों पर केंद्रित है। यही बिंदु दोनों पक्षों के बीच बातचीत के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से माने जा रहे हैं।

ब्रुसेल्स में होने वाली यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि यह अब तक की 15 राउंड की तकनीकी वार्ताओं के बाद की पहली उच्च-स्तरीय राजनीतिक बातचीत है। माना जा रहा है कि यदि इस बैठक में सहमति के बिंदु तय हो जाते हैं, तो समझौते को अगले वर्ष की शुरुआत में हस्ताक्षर के लिए तैयार किया जा सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के इस दौर में यह व्यापार समझौता न केवल आर्थिक सहयोग बल्कि भूराजनीतिक संतुलन को भी मजबूत करेगा। दोनों पक्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने और चीन पर निर्भरता घटाने के लिए एक साझा दृष्टिकोण विकसित कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, पीयूष गोयल का यह दौरा भारत और यूरोप के बीच आर्थिक रिश्तों में नई ऊर्जा भरने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यदि समझौता सफल होता है, तो यह भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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