नोएडा के पल्मोनोलॉजिस्ट ने बताए दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से फेफड़ों और आंखों की सुरक्षा के सरल उपाय दिवाली के बाद जहरीली हवा का असर

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दिवाली की चमक भले ही कुछ दिनों की हो, लेकिन इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में जो धुंध छा जाती है, वह कई हफ्तों तक लोगों की सेहत बिगाड़ देती है। इस बार भी राजधानी की हवा बेहद ख़राब स्तर पर पहुँच गई है। सांस लेने में तकलीफ़, खांसी, घरघराहट, आंखों में जलन और सूखापन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।

नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरुणाचलम एम ने बताया कि दिवाली के बाद की स्थिति सिर्फ अस्थमा के रोगियों या बुजुर्गों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी खतरनाक है।
वे कहते हैं —“आसमान काला पड़ जाता है, आँखें लाल हो जाती हैं, और लोगों को सांस लेने में तकलीफ़ होती है। यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है। हम एक ‘साइलेंट हेल्थ क्राइसिस’ का सामना कर रहे हैं।”

वायु प्रदूषण का फेफड़ों पर प्रभाव

दिवाली के बाद दिल्ली की हवा में PM2.5 और PM10 कणों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। ये सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में जाकर जमा होते हैं और सांस से जुड़ी बीमारियों का कारण बनते हैं।

डॉ. अरुणाचलम बताते हैं कि —

“धुएं और धूल के मिश्रण से बनी यह जहरीली हवा हमारे श्वसन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करती है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सीओपीडी (COPD) के रोगियों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।”

लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की क्षमता घटती है, जिससे व्यक्ति को थोड़ी सी मेहनत में भी सांस फूलने लगती है।

आंखों पर प्रदूषण का असर

जहां अधिकतर लोग फेफड़ों की सुरक्षा पर ध्यान देते हैं, वहीं आंखों की सुरक्षा को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
डॉ. अरुणाचलम के अनुसार, “दिवाली के बाद बहुत से मरीज आंखों में लालिमा, खुजली, जलन और पानी आने की शिकायत लेकर आते हैं। हवा में मौजूद प्रदूषक आंखों की नमी को कम कर देते हैं, जिससे सूखापन और जलन बढ़ जाती है।”

प्रदूषण से जुड़ी आंखों की सामान्य समस्याएं:

आंखों में लालिमा और जलन

सूखापन और खुजली

लगातार पानी आना

बच्चों द्वारा आंखें मलना, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है

सिर्फ मास्क पहनना काफी नहीं

अक्सर लोग मानते हैं कि मास्क पहनने से वे प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षित हो जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आधा सच है।
डॉ. अरुणाचलम कहते हैं —

“मास्क सिर्फ कणों को रोकता है, लेकिन गैसों और धुएं के सूक्ष्म तत्वों से पूरी तरह बचाव नहीं करता। इसके लिए घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता सुधारना भी जरूरी है।”

वे सलाह देते हैं कि —

N95 या N99 मास्क का प्रयोग करें।

सर्जिकल मास्क या कपड़े के मास्क प्रदूषण से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते।

यदि बाहर निकलना जरूरी हो तो सुबह या देर रात के समय से बचें, क्योंकि इन समयों में धुंध और धूल अधिक रहती है।

प्रदूषण से बचने के सरल उपाय

1. एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें
घर और ऑफिस में HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर लगाएं। इससे हवा में मौजूद धूल और विषाक्त कणों की मात्रा घटती है।

2. पौधे लगाएं
एलोवेरा, स्नेक प्लांट, पीस लिली और मनी प्लांट जैसे पौधे प्राकृतिक रूप से हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं।

3. आंखों की सुरक्षा करें
बाहर निकलते समय सनग्लास पहनें ताकि धूल और धुएं से सीधा संपर्क न हो।
दिन में दो-तीन बार आर्टिफिशियल टीयर्स (Artificial Tears) या आई ड्रॉप्स का उपयोग करें ताकि आंखें नम बनी रहें।

4. पोषण पर ध्यान दें
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार जैसे — नींबू, संतरा, अमरूद, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, हल्दी और अदरक — फेफड़ों को मज़बूत बनाते हैं और शरीर को टॉक्सिन्स से बचाते हैं।

5. घर में वेंटिलेशन रखें लेकिन सावधानी से
दिन में कुछ देर खिड़कियाँ खोलें जब हवा साफ़ हो, ताकि ताज़ी हवा अंदर आए। लेकिन सुबह-सुबह या रात के समय जब AQI बहुत खराब हो, तब खिड़कियाँ बंद रखें।

धूम्रपान और आतिशबाज़ी से दूरी

दिवाली के दौरान पटाखों का धुआँ और बाद में धूम्रपान करने की आदत फेफड़ों पर दोहरा हमला करती है।
डॉ. अरुणाचलम सलाह देते हैं —

“ऐसे समय में धूम्रपान करने से फेफड़ों की सूजन कई गुना बढ़ जाती है। बेहतर है कि इस मौसम में पूरी तरह स्मोक-फ्री रहें।”

बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सावधानी

बच्चों को खुले में खेलने से बचाएँ।

बुजुर्ग और अस्थमा रोगी घर के अंदर हल्के व्यायाम करें।

इनहेलर या दवाएँ डॉक्टर की सलाह अनुसार समय पर लें।

यदि सांस लेने में तकलीफ बढ़े, तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

निष्कर्ष

दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण एक स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है।
यह सिर्फ सांस लेने की समस्या नहीं, बल्कि आंखों और संपूर्ण श्वसन तंत्र के लिए खतरा है।
सही मास्क, स्वच्छ हवा, पौष्टिक आहार और सावधानीपूर्ण आदतें अपनाकर हम खुद को और अपने परिवार को इस विषैली धुंध से बचा सकते हैं।

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