नोवाक जोकोविच कोर्ट पर भावुक, पूर्व गुरु निकोला पिलिक को दी श्रद्धांजलि

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ग्रीस में आयोजित हेलेनिक चैंपियनशिप के दौरान एक बेहद भावुक क्षण देखने को मिला, जब नोवाक जोकोविच कोर्ट पर अपने आँसुओं को रोक नहीं पाए। जोकोविच अपने पूर्व गुरु और मार्गदर्शक निकोला पिलिक को श्रद्धांजलि देते हुए टूट गए। पिलिक का इसी साल सितंबर में 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। मैच के बाद जब जोकोविच को उनके सम्मान में बनाया गया एक वीडियो दिखाया गया, तो वह अपने भावनाओं में बह गए और कोर्ट पर ही आँसू पोंछते दिखाई दिए। यह दृश्य दर्शकों के दिल को छू गया।

इंटरव्यू के दौरान भी अपने आप को संभाल नहीं पाए जोकोविच ने कहा, “माफ़ करें… वह मेरे लिए सिर्फ़ एक कोच नहीं थे। वह मेरे लिए परिवार थे। उन्होंने मुझे और मेरे भाइयों को एक घर, एक दिशा और वह आत्मविश्वास दिया जिसने मुझे आज इस मुकाम तक पहुँचाया।” जोकोविच ने दर्शकों से पिलिक के लिए तालियों और सम्मान का अनुरोध किया। पूरे स्टेडियम में उनके इस भावुक निवेदन का असर साफ दिखा।

जोकोविच ने आगे कहा कि पिलिक को वह हमेशा अपने “टेनिस पिता” के रूप में याद करेंगे। उनके अनुसार, पिलिक ने न केवल उनके खेल को निखारा, बल्कि एक इंसान के रूप में भी उन्हें आकार दिया। उन्होंने कहा, “उन्होंने मेरे लिए जो किया, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। मुझे आज भी वह संदेश याद हैं, जिनमें वह कहते थे – धैर्य रखो, विश्वास रखो और खेल से प्यार करो।” यह रिश्ता सिर्फ़ कोच और खिलाड़ी का नहीं था, बल्कि पिता और बेटे जैसा था।

पिलिक एक बेहद सम्मानित टेनिस व्यक्तित्व थे। उन्होंने 1972 में फ्रेंच ओपन के फाइनल में जगह बनाई थी और 1962 में विंबलडन के युगल फाइनल में भी पहुंचे थे। इसके अलावा उन्होंने यूएस ओपन में युगल खिताब भी जीता। लेकिन टेनिस जगत में उनका सबसे बड़ा योगदान कोचिंग के क्षेत्र में माना जाता है। उन्होंने कई दिग्गज खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया, पर जोकोविच के साथ उनका रिश्ता सबसे खास रहा।

जोकोविच ने याद किया कि वह केवल 10 साल के थे जब पिलिक ने उन्हें अपने कैंप में जगह दी और म्यूनिख में प्रशिक्षण देना शुरू किया। वहीं से उनके पेशेवर करियर की असल नींव रखी गई। उन्होंने कहा, “अगर पिलिक मेरे जीवन में नहीं होते, तो शायद आज मैं वह खिलाड़ी नहीं होता, जिसे आप जानते हैं।”

यह भावुक दृश्य दुनिया भर के टेनिस प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी लोग जोकोविच की सच्ची भावनाओं की सराहना कर रहे हैं। खेल जगत में अक्सर खिलाड़ियों को बेहद मजबूत और कठोर छवि के साथ देखा जाता है, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि चैंपियंस के दिल भी बेहद कोमल होते हैं।

जोकोविच ने अंत में कहा, “जब तक मैं टेनिस खेलता रहूँगा और जब तक मैं जीवित रहूँगा, उनके नाम और योगदान का सम्मान करता रहूँगा। वह हमेशा मेरे साथ रहेंगे।” यह श्रद्धांजलि सिर्फ़ एक क्षण नहीं, बल्कि एक गहरे रिश्ते की अमर स्मृति बन गई।

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