राजनीति परिवारों की जायदाद नहीं… वंशवाद पर कांग्रेस के सांसद शशि थरूर का करारा प्रहार

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थरूर ने राजनीतिक वंशवाद के और उदाहरण देते हुए कहा, ‘यही बात समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव पर भी लागू होती है, जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और जिनके बेटे अखिलेश यादव बाद में उसी पद पर रहे.

वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने भारतीय राजनीति में वंशवाद की राजनीति पर करारा प्रहार करते हुए एक तीखा सवाल खड़ा कर दिया है. एक अंतरराष्‍ट्रीय आलेख में थरूर ने साफ शब्दों में कहा है कि ‘भारतीय राजनीति परिवारों की जायदाद नहीं है’ और वंशवादी राजनीति लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है. यह टिप्पणी इसलिए राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रही है, क्योंकि यह आलोचना उस समय आई है जब उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस एक ही परिवार (नेहरू-गांधी परिवार) के नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित है. यह आलेख प्रोजेक्ट सिंडिकेट नामक एक अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया संस्था के पोर्टल पर प्रकाशित हुआ है.

वंशवाद को बताया गंभीर खतरा 

शशि थरूर ने अपने इस आलेख में कहा है कि वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ‘गंभीर खतरा’ है. अब समय आ गया है कि भारत ‘‘वंशवाद की जगह योग्यता” को स्वीकार्यता प्रदान करे. थरूर ने कहा कि जब राजनीतिक सत्ता का निर्धारण योग्यता, प्रतिबद्धता या जमीनी स्तर पर जुड़ाव के बजाय वंशवाद से होता है, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
उनके इस लेख को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा और कटाक्ष करते हुए कहा कि थरूर ‘खतरों के खिलाड़ी’ बन गए हैं और अब तक पता नहीं उनका क्या अंजाम होगा क्योंकि ‘प्रथम परिवार’ (गांधी-नेहरू परिवार) बहुत प्रतिशोधी है.

पार्टियों की मंशा पर सवाल 

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट’ के लिए लिखे एक लेख में तिरुवनंतपुरम के सांसद थरूर ने बताया कि नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस से जुड़ा है, लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में वंशवाद का बोलबाला है. थरूर का यह बयान भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद राजनयिक प्रयासों पर उनकी टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद के कुछ सप्ताह बाद आया है. उस समय उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से अलग थीं और कई पार्टी नेताओं ने उनकी मंशा पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा था.

दशकों से वंशवाद हावी 

‘इंडियन पॉलिटिक्स आर ए फेमिली बिजनेस’ शीर्षक वाले लेख में थरूर ने कहा कि दशकों से एक परिवार भारतीय राजनीति पर हावी रहा है और नेहरू-गांधी परिवार का प्रभाव भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ा हुआ है. उनका कहना था, ‘लेकिन यह विचार पुख्ता हुआ है कि राजनीतिक नेतृत्व एक जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है. यह विचार भारतीय राजनीति में हर पार्टी, हर क्षेत्र और हर स्तर पर व्याप्त है.’ थरूर ने कहा कि बीजू पटनायक के निधन के बाद उनके बेटे नवीन ने अपने पिता की खाली लोकसभा सीट जीती. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने यह पद अपने बेटे उद्धव को सौंप दिया और अब उद्धव के बेटे आदित्य भी प्रतीक्षारत हैं.

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