PAC चुनाव में होगी ‘असली TMC’ की अग्निपरीक्षा! ममता बनर्जी बनाम ऋतब्रत गुट, विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

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पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां सियासी संघर्ष केवल विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच नहीं, बल्कि एक ही पार्टी के दो गुटों के बीच दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही अंदरूनी जंग अब विधानसभा के भीतर पहुंच चुकी है और आने वाला लोक लेखा समिति (PAC) चुनाव इस संघर्ष की पहली बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गुट है, जबकि दूसरी तरफ बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला धड़ा खुद को “असली TMC” बताकर संगठन और राजनीतिक वैधता की लड़ाई लड़ रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि PAC अध्यक्ष पद का चुनाव केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि यह दोनों गुटों की वास्तविक ताकत का सार्वजनिक प्रदर्शन बन सकता है। विधानसभा सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत गुट दावा कर रहा है कि उसे TMC के लगभग 80 में से 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब पार्टी से निष्कासित किए जा चुके ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर दावा ठोक दिया और पार्टी नेतृत्व द्वारा सुझाए गए नाम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी के भीतर विवाद खुलकर सामने आ गया। हाल ही में आयोजित एक विशेष बैठक में बागी गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा करते हुए वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, समानांतर संगठनात्मक ढांचा भी घोषित कर दिया गया, जिससे पार्टी में विभाजन की रेखा और गहरी हो गई।

मामला अब केवल संगठन तक सीमित नहीं है। दोनों गुट चुनाव आयोग और अदालतों में भी अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ममता गुट का कहना है कि पार्टी की आधिकारिक राष्ट्रीय कार्यकारिणी और संगठनात्मक ढांचा उनके नियंत्रण में है, जबकि बागी गुट का दावा है कि अधिकांश विधायक और कार्यकर्ता उनके साथ हैं।

इस राजनीतिक संघर्ष के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने PAC समेत चार महत्वपूर्ण समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नामांकन की अंतिम तिथि 30 जून तय की गई है, जबकि 5 जुलाई को जरूरत पड़ने पर मतदान कराया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव विधानसभा के भीतर दोनों गुटों की वास्तविक ताकत का पहला आधिकारिक संकेत देगा।

लोक लेखा समिति यानी PAC विधानसभा की सबसे प्रभावशाली समितियों में से एक मानी जाती है। यह समिति सरकारी खर्चों की निगरानी करती है और यह सुनिश्चित करती है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल नियमों और नीतियों के अनुरूप हो। परंपरागत रूप से इसका अध्यक्ष विपक्ष से चुना जाता है। लेकिन इस बार विपक्ष के भीतर ही दो गुट आमने-सामने हैं, जिससे चुनाव का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि PAC चुनाव में ऋतब्रत गुट बेहतर प्रदर्शन करता है, तो वह विधानसभा के भीतर अपनी वैधता को मजबूत करने में सफल हो सकता है। वहीं यदि ममता बनर्जी का गुट नियंत्रण बनाए रखने में कामयाब रहता है, तो यह उनके नेतृत्व के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक संदेश होगा।

अब पूरे बंगाल की नजरें 5 जुलाई पर टिकी हैं। क्योंकि यह चुनाव केवल एक समिति के अध्यक्ष का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि विधानसभा के भीतर वास्तविक समर्थन किसके पास है और आखिरकार तृणमूल कांग्रेस की असली राजनीतिक विरासत पर दावा किसका मजबूत है।

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