बता दें कि अदालत ने तीन महीने पहले ये आदेश जारी किया था, जिसका राज्यों द्वारा पालन नहीं किया गया और इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की है.
देशभर में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. बता दें कि पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरी इस मामले को लेकर कोर्ट में पेश हुए हैं.
एनिमल बर्थ कंट्रोल के नियमों पर अमल को लेकर जवाब दाखिल न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के चीफ सेकेट्री को तलब किया था. इसके तहत आज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए हैं.
तीन महीने पहले अदालत ने जारी किया था आदेश
बता दें कि अदालत ने तीन महीने पहले ये आदेश जारी किया था, जिसका राज्यों द्वारा पालन नहीं किया गया और इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की है. राज्यों को आवारा कुत्तों के हमलों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी और इस समस्या को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए सुझाव भी देने होंगे.
22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को इस मामले को लेकर दिया था निर्देश
बता दें कि 22 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले का दायरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमाओं से आगे बढ़ाते हुए सबी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसमें पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों के अनुपालन के उद्देश्य से कुत्तों के लिए उपलब्ध बाड़ा, पशु चिकित्सकों, कुत्तों को पकड़ने वाले कर्मियों और विशेष रूप से संशोधित वाहनों एवं पिंजरों जैसे संसाधनों के पूर्ण आंकड़ों के साथ अनुपालन पर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था. पीठ ने इस मामले में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी पक्षकार बनाया था और कहा था कि एबीसी नियमों का प्रयोग पूरे भारत में एक समान है.