UPI पेमेंट हर जगह, फिर 2000 तक कैश डोनेशन की इजाजत क्यों? चुनाव आयोग को SC का नोटिस

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याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के तौरान तर्क दिया कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम ने फाइनेंशियल लैंडस्केप को बदल दिया है. जिसके बाद कैश कंट्रीब्यूशन की इजाज़त जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है.

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक नोटिस जारी किया किया है. ये नोटिस राजनीतिक दलों को 2000 रुपये तक के कैश डोनेशन पर इनकम टैक्स में छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस रिट याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राजनीतिक दलों के चंदे में पारदर्शिता की मांग उठाई गई थी. साथ ही राजनीतिक दलों की तरफ से दाखिल इनकम टैक्स रिटर्न और चंदा रिपोर्ट में बड़ा अंदर होने का भी आरोप लगाया गया था.

इनकम टैक्स अधिनियम के प्रावधान को चुनौती

याचिकाकर्ता ने इनकम टैक्स अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती दी है, जो राजनीतिक दलों को 2000 रुपये तक का नकद डोनेशन दिए जाने की परमिशन देता है. उसका दावा है कि देशभर में हर जगह डिजिटल पेमेंट बहुत ही बढ़िया तरीके से हो रहा है, फिर 2000 रुपये तक के नकद चंदे की परमिशन दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है.

2000 रुपये तक का नकद डोनेशन पर दलील

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सीनियर अधिवक्ता विजय हंसारिया की दलीलें सुनने के बाद चुनाव आयोग समेत प्रतिवादियों से इस पर जवाब तलब किया. विजय हंसारिया ने कहा कि राजनीतिक दलों को इस प्रोविजन के तहत टैक्स छूट इस आधार पर मिलती है कि वे कंट्रीब्यूटर्स की डिटेल्स को PAN डिटेल और बैंक डिटेल के साथ बताएं.

बता दें कि डॉ. खेम सिंह भाटी की तरफ से दायर की गई याचिका में इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 13A(d) की संवैधानिकता को चुनौती दी गई, जो राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड और बैंकिंग चैनल से मिले 2000 रुपये से ज़्यादा के योगदान को इनकम की डेफिनिशन से बाहर रखता है. इस तरह यह प्रावधान पार्टियों को 2000 रुपये तक का कैश डोनेशन लेने की इजाज़त देता है, जिसे टैक्स डिस्क्लोजर से छूट मिली हुई थी.

कैश कंट्रीब्यूशन की इजाज़त का कोई लॉजिक नहीं

याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के तौरान तर्क दिया कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम ने फाइनेंशियल लैंडस्केप को बदल दिया है. जिसके बाद कैश कंट्रीब्यूशन की इजाज़त जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है. उनका भरोसा उस सरकारी डेटा पर हैं, जो दिखाता है कि UPI की की पहुंच हर जगह पर है. उन्होंने कहा कि अकेले जून, 2025 में UPI लेनदेन 24.03 लाख करोड़ से ज़्यादा का रहा. एनोनिमिटी को आसान बनाने केबजाय कैश डोनेशन का कोई वैध मकसद नहीं है.

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