बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर क्या खेल करेंगे? देखिए नई पार्टियों ने डेब्यू में क्या किया

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बिहार चुनाव में सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर का जबरदस्त असर दिखा है. उनकी सभाओं में भीड़ भी जुटी है. लेकिन ग्राउंड जीरो पर काम कर रहे एक्सपर्ट का कहना है कि सोशल मीडिया पर जैसा पीके का असर दिख रहा है, वैसा ग्राउंड जीरो पर नहीं है.

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर रविवार शाम NDTV पर कई इलेक्शन एक्सपर्ट और नेताओं के साथ खास चर्चा की. जिसमें प्रशांत किशोर के असर पर भी खूब बात हुई. इस खास प्रोग्राम में सी-वोटर के फाउंटर यशवंत देशमुख, वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला, सतीश के सिंह, विजय त्रिवेदी, इलेक्शन एक्सपर्ट अमिताभ तिवारी सहित कई अन्य एक्सपर्ट मौजूद रहे. NDTV के प्रधान संपादक राहुल कंवल के साथ हुई खास चर्चा में एक रोचक जानकारी उन राजनीतिक दलों पर के बारे में सामने आई, जिन्होंने अपने डेब्यू पर ही बड़ा धमाका किया था.

साल 1983, आंध्र प्रदेश में एनटी रामाराव का बड़ा धमाका

साल 1983 में आंध्र प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने एनटी रामाराव की पार्टी TDP ने बड़ा धमाका किया था. टीडीपी का यह पहला चुनाव था और पहले ही चुनाव में टीडीपी ने 46 प्रतिशत वोट के साथ 294 में से 202 सीटों पर जीत हासिल की. एनटी रामाराव की पार्टी को मिली इस बड़ी जीत के साथ ही आंध्रा से कांग्रेस सत्ता से दूर हो गई है.

साल 1985, असम में प्रफुल्ल महंता का धमाका

1983 में जैसा धमाका आंध्रा में हुआ, वैसा ही कुछ दो साल बाद असम में देखने को मिला. असम में 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रफुल्ल महंता की पार्टी असम गण परिषद ने 35 प्रतिशत वोट के साथ कुल 126 में से 64 सीटों पर जीत हासिल की. इस बड़ी जीत के साथ पहली बार की पार्टी असम गण परिषद राज्य में सत्ता में आई.

साल 2013, दिल्ली में केजरीवाल का धमाकेदार डेब्यू

1985 के बाद अलग-अलग राज्यों में हुए चुनाव में कई नए राजनीतिक दल आए और गए. फिर आया साल 2013. इस साल दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की नई नवेली पार्टी आम आदमी पार्टी ने 30 प्रतिशत वोट के साथ कुल 70 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की. बाद में दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को दो बार सीएम बनाया.

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