स्टैनफोर्ड की छोटी आँख की चिप नेत्रहीनों को फिर से देखने में मदद करेगी

94 0

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक छोटी वायरलेस चिप और उन्नत स्मार्ट चश्मों के संयोजन से उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजनरेशन (Age-related Macular Degeneration – AMD) से पीड़ित लोगों की दृष्टि आंशिक रूप से बहाल करने में सफलता पाई है। स्टैनफोर्ड मेडिसिन और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों द्वारा किए गए नैदानिक अध्ययन में, 32 में से 27 प्रतिभागियों ने इम्प्लांट लगवाने के एक साल के भीतर पढ़ने की क्षमता वापस पाई।

PRIMA इम्प्लांट क्या है?
स्टैनफोर्ड में विकसित यह PRIMA इम्प्लांट दृष्टि हानि वाले लोगों को उपयोगी दृष्टि प्रदान करने वाला पहला कृत्रिम नेत्र उपकरण है। यह तकनीक रोगियों को आकृतियों और पैटर्न को पहचानने में सक्षम बनाती है, जिसे “रूप दृष्टि” (form vision) कहा जाता है। नेत्र विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल पलेंकर, पीएचडी ने बताया, “कृत्रिम उपकरणों से दृष्टि प्रदान करने के सभी पिछले प्रयासों का परिणाम केवल प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता के रूप में निकला था, न कि वास्तव में रूप दृष्टि के रूप में। PRIMA इसे संभव बनाता है।”
इस शोध का सह-नेतृत्व पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जोस-एलेन साहेल, एम.डी. और जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय के एम.डी. फ्रैंक होल्ज़ ने किया।

PRIMA सिस्टम कैसे काम करता है?

PRIMA प्रणाली में दो मुख्य घटक हैं:
1. स्मार्ट चश्मे में लगे छोटे कैमरे
2. रेटिना में प्रत्यारोपित वायरलेस चिप

कैमरा दृश्य जानकारी को कैप्चर करता है और उसे इन्फ्रारेड प्रकाश के माध्यम से इम्प्लांट तक पहुँचाता है। इम्प्लांट इसे विद्युत संकेतों में बदल देता है, जो क्षतिग्रस्त फोटोरिसेप्टर की जगह लेते हैं। इसके माध्यम से मस्तिष्क दृश्य डेटा को संसाधित कर सकता है और रोगी आकृतियों और पैटर्न को पहचान सकता है।
पलेंकर ने बताया कि उन्होंने यह विचार 20 साल पहले आँखों की बीमारियों के लिए ऑप्थेल्मिक लेज़रों पर काम करते हुए सोचा था। उनका मानना है कि आँखों की पारदर्शिता का फायदा उठाकर दृष्टि बहाल की जा सकती है।

खोए हुए फोटोरिसेप्टरों को बदलना
नवीनतम परीक्षण में प्रतिभागियों को उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजनरेशन के गंभीर चरण थे, जो केंद्रीय दृष्टि को नष्ट कर देते हैं। दुनिया भर में 50 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। PRIMA इम्प्लांट केवल 2×2 मिलीमीटर का है और इसे रेटिना में उस हिस्से पर लगाया जाता है जहाँ प्राकृतिक फोटोरिसेप्टर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यह चिप इन्फ्रारेड प्रकाश का पता लगाती है और प्राकृतिक फोटोरिसेप्टर की जगह कार्य करती है। पलांकर ने कहा, “इन्फ्रारेड प्रक्षेपण इसलिए किया जाता है ताकि इम्प्लांट के बाहर बची हुई फोटोरिसेप्टर्स पर कोई असर न पड़े। यह प्रणाली केंद्रीय दृष्टि को आंशिक रूप से बहाल करती है।”

भविष्य के दर्शन
PRIMA डिवाइस फिलहाल केवल काले और सफेद दृश्य प्रदान करता है। पलेंकर और उनकी टीम एक नया सॉफ्टवेयर विकसित कर रहे हैं, जो जल्द ही ग्रेडेड शेड्स (grayscale range) को सक्षम करेगा। इसका मतलब है कि भविष्य में रोगी रंगों और अधिक सूक्ष्म दृश्यों को भी देख पाएंगे। यह शोध दृष्टिहीन लोगों के जीवन में स्वतंत्रता और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और विश्वभर के नेत्रहीन रोगियों के लिए नई उम्मीद जगाता है।

Related Post

चीन ने AI-जनित सामग्री पर नियंत्रण कड़ा किया: नया कानून क्या कहता है?

Posted by - November 13, 2025 0
निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, संवेदनशील मुद्दों पर नकली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से उत्पन्न सामग्री के बढ़ते प्रचलन के बीच ,…

अमेज़न में छंटनी एआई से नहीं, बल्कि ‘संस्कृति सुधार’ का हिस्सा है: सीईओ एंडी जेसी

Posted by - October 31, 2025 0
अमेज़न के सीईओ एंडी जेसी ने हाल ही में कंपनी में हुई बड़े पैमाने पर छंटनी को लेकर एक महत्वपूर्ण…

Xbox क्लाउड गेमिंग अब भारत में उपलब्ध: बिना कंसोल अब खेलें सैकड़ों Xbox गेम

Posted by - November 11, 2025 0
नई दिल्ली: माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में Xbox क्लाउड गेमिंग सेवा की उपलब्धता की घोषणा कर दी है। अब भारतीय उपयोगकर्ता…

सैम ऑल्टमैन का नया दांव: Merge Labs देगा Neuralink को सीधी टक्कर, अब बिना सर्जरी ‘सोच से मशीन कंट्रोल’ संभव

Posted by - October 27, 2025 0
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने एक नया ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) स्टार्टअप Merge Labs लॉन्च किया है, जो एलन मस्क…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *