बचपन और युवावस्था में दोस्त हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा होते हैं। घंटों की बातें, अचानक मिलने के प्लान और हर खुशी-गम में साथ निभाने वाले वही दोस्त, 40 की उम्र आते-आते अक्सर दूर होते नजर आते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि जिन दोस्तों के बिना एक दिन नहीं गुजरता था, उनसे बात किए महीनों या साल बीत गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि जीवन की बदलती जिम्मेदारियां और प्राथमिकताएं होती हैं। 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते व्यक्ति परिवार, करियर और माता-पिता की जिम्मेदारियों के बीच उलझ जाता है। इसी वजह से दोस्ती के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है।
सैंडविच जनरेशन का दबाव
इस उम्र में अधिकतर लोग बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता दोनों की जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं। एक ओर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता होती है, वहीं दूसरी ओर माता-पिता की देखभाल का दायित्व भी बढ़ जाता है। ऐसे में दोस्तों से मिलने-जुलने का समय कम हो जाता है।
बदल जाती हैं प्राथमिकताएं
समय के साथ हर व्यक्ति की जिंदगी अलग दिशा में आगे बढ़ती है। कोई करियर में व्यस्त हो जाता है, कोई विदेश में बस जाता है, तो कोई आध्यात्मिक या फिटनेस लाइफस्टाइल अपना लेता है। अलग-अलग रुचियों और जीवनशैली के कारण बातचीत के विषय भी कम होने लगते हैं।
करियर का बढ़ता दबाव
40 की उम्र अक्सर करियर के सबसे महत्वपूर्ण दौरों में से एक होती है। नौकरी या बिजनेस की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और लोगों के पास समय की कमी होने लगती है। ऐसे में वीकेंड भी आराम और परिवार के साथ बीतने लगते हैं।
छोटा लेकिन मजबूत सोशल सर्कल
मनोविज्ञान के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति अपनी सामाजिक ऊर्जा को सीमित लोगों पर खर्च करना पसंद करता है। बड़ी पार्टियों और भीड़भाड़ से ज्यादा लोग अब शांत और सार्थक रिश्तों को महत्व देने लगते हैं। यही कारण है कि दोस्तों का दायरा छोटा होता जाता है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि दोस्ती की अहमियत उम्र के साथ कम नहीं होती। यदि आप पुराने दोस्तों से दोबारा जुड़ने की कोशिश करें, एक कॉल या एक संदेश भेजें, तो रिश्तों में फिर से गर्माहट लौट सकती है।