अक्टूबर में निजी क्षेत्र की गतिविधियाँ पांच महीने के निचले स्तर पर, PMI रिपोर्ट में गिरावट

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24 अक्टूबर 2025 | भारत के निजी क्षेत्र की गतिविधियाँ अक्टूबर में पाँच महीने के निचले स्तर पर पहुँच गई हैं। एसएंडपी ग्लोबल और एचएसबीसी द्वारा संकलित फ्लैश इंडिया कम्पोजिट पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अक्टूबर में गिरकर 59.9 पर आ गया, जबकि सितंबर में यह 61.0 था। यह रॉयटर्स पोल के अनुमान 61.2 से भी कम है।
हालांकि PMI के 50 अंक से ऊपर होने के कारण निजी क्षेत्र का विकास सक्रिय बना हुआ है, लेकिन कमजोर मांग और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण व्यापारिक आशावाद पर असर पड़ा है।

सेवा क्षेत्र और विनिर्माण में अंतर
समग्र PMI सूचकांक में गिरावट मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में धीमी वृद्धि के कारण हुई। सेवा व्यवसाय गतिविधि सूचकांक सितंबर के 60.9 से घटकर 58.8 हो गया। वहीं, विनिर्माण गतिविधियाँ पिछले महीने के चार महीने के निचले स्तर से उबरकर 57.7 से बढ़कर 58.4 पर पहुंची। नए ऑर्डर के उप-सूचकांक में थोड़ी मजबूती रही, लेकिन मई के बाद यह सबसे धीमी वृद्धि पर था। सेवा क्षेत्र में विकास की धीमी गति से समग्र वृद्धि पर दबाव पड़ा, जबकि वस्तु उत्पादकों ने सितंबर की तुलना में थोड़ी तेज़ वृद्धि दर्ज की।

अंतर्राष्ट्रीय मांग और निर्यात प्रभावित
भारत के वस्तु और सेवा निर्यात की मांग सात महीनों में सबसे कम रही। विशेष रूप से अमेरिकी बाजार में निर्यात धीमा पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारत रूसी तेल की खरीद बंद नहीं करता, तब तक टैरिफ उच्च स्तर पर रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने मासिक बुलेटिन में कहा कि व्यापारिक गतिविधियाँ लचीली बनीं, लेकिन उच्च टैरिफ और वैश्विक मांग में कमी से निर्यात प्रभावित हुआ।

लागत और व्यापारिक आशावाद
सितंबर में GST में कटौती से कंपनियों पर लागत का दबाव कम हुआ, लेकिन कंपनियों ने इसका लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुँचाया और बढ़ती परिचालन लागत की भरपाई के लिए बिक्री शुल्क बढ़ा दिए। आगामी वर्ष के लिए व्यापारिक आशावाद में कमी देखी गई है। कंपनियों ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मांग में अस्थिरता और बाजार की स्थिति को लेकर चिंताएँ जताई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि निजी क्षेत्र की यह धीमी गति अंतर्राष्ट्रीय बाजार और लागत दबावों के कारण उत्पन्न हुई है, और आगामी महीनों में विकास दर पर नजर रखनी होगी।

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