मुजफ्फरपुर (बिहार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार के मुजफ्फरपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और कहा कि कांग्रेस और राजद ने वोटों के लिए छठी मैया का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छठ पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर (UNESCO Heritage) सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है।
छठ पर्व को लेकर बड़ा ऐलान
पीएम मोदी ने कहा — “छठ महापर्व सिर्फ बिहार नहीं, बल्कि पूरे भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। हमारी सरकार इसे यूनेस्को हेरिटेज का दर्जा दिलाने की कोशिश कर रही है।” उन्होंने इस मौके पर बिहारवासियों को भरोसा दिलाया कि उनकी परंपराओं और त्योहारों को वैश्विक पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कई रैलियों को संबोधित करेंगे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि “बिहार के लोग भाजपा-एनडीए को शानदार जीत दिलाएंगे।” इससे पहले 24 अक्टूबर को पीएम मोदी ने समस्तीपुर और बेगूसराय में रैलियों के ज़रिए एनडीए के अभियान की शुरुआत की थी। रैली के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और राजद ने बिहार के गौरवशाली त्योहारों और परंपराओं को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार “विकसित बिहार, मजबूत संस्कृति” के एजेंडे पर काम कर रही है, जबकि विपक्ष केवल “वंशवाद और स्वार्थ की राजनीति” करता है। उधर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी बिहार में सक्रिय हैं और वे नालंदा व शेखपुरा जिलों में रैलियाँ करेंगे।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की लखीसराय, मुंगेर, नालंदा और पटना में चार चुनावी सभाएँ तय की गई हैं। अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “लालू प्रसाद अपने बेटे तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री और सोनिया गांधी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती हैं, लेकिन दोनों पद खाली नहीं हैं।” इस बीच, राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि इंडिया ब्लॉक का घोषणापत्र “जनता के लिए गठबंधन का संकल्प” है। उन्होंने कहा कि अगर महागठबंधन सत्ता में आता है, तो हर वादा और घोषणा को पूरा किया जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में इस बार चुनावी मुकाबला एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच कड़ा होने जा रहा है।
पीएम मोदी द्वारा छठ पर्व को यूनेस्को हेरिटेज का दर्जा दिलाने का मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को सीधे छूता है, जो बिहार के चुनावी परिदृश्य में बड़ा असर डाल सकता है।