दक्षिण कोरिया में चीनी नेता शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प वाशिंगटन रवाना

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बुसान (दक्षिण कोरिया)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गुरुवार (30 अक्टूबर, 2025) को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आमने-सामने की बैठक के बाद वाशिंगटन लौट गए। यह बैठक एशिया दौरे के अंतिम दिन हुई और इसे हाल के महीनों में व्यापारिक तनावों के बाद अमेरिका-चीन संबंधों को स्थिर करने का अहम प्रयास माना जा रहा है। ट्रम्प-शी बैठक: तनाव घटाने की कोशिश करीब एक घंटे 40 मिनट चली इस बैठक में दोनों नेताओं ने कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की।

बैठक के एजेंडे में प्रमुख रूप से शामिल रहे विषय थे —

टैरिफ (शुल्क विवाद)

कंप्यूटर चिप्स का व्यापार

दुर्लभ मृदा खनिजों की आपूर्ति

और एशिया में रणनीतिक तनाव से जुड़े मुद्दे

हालांकि बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद व्हाइट हाउस ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया और राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी पत्रकारों से कोई टिप्पणी नहीं की।

टैरिफ पर नरमी के संकेत

दक्षिण कोरिया जाते समय एयर फ़ोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि “फेंटेनाइल बनाने में चीन की भूमिका के संबंध में लगाए गए टैरिफ को कम किया जा सकता है। मुझे उम्मीद है कि इसे घटाया जाएगा क्योंकि चीन इस स्थिति में हमारी मदद करेगा।” उन्होंने आगे कहा — “चीन के साथ हमारे संबंध इस समय बहुत अच्छे हैं।”

एशिया यात्रा का समापन
ट्रम्प ने इस बैठक के साथ तीन एशियाई देशों की पाँच दिवसीय यात्रा पूरी की। उनकी यह यात्रा एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले संपन्न हुई। बैठक का स्थान था बुसान, जो शिखर सम्मेलन स्थल ग्योंगजू से लगभग 76 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक प्रमुख बंदरगाह शहर है।

व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि
व्हाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल की वापसी के बाद से ही ट्रम्प ने चीन के खिलाफ टैरिफ नीतियों को फिर से तेज किया है। वहीं, चीन ने भी दुर्लभ मृदा तत्वों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर जवाब दिया था। इन नीतियों के चलते विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है, और इस मुलाकात को इस तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

विश्लेषण: संबंध सुधारने की दिशा में संकेत
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का संकेत हो सकती है। दोनों पक्षों को इस बात का एहसास है कि अत्यधिक आर्थिक टकराव से दोनों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए वार्ता का फोकस पारस्परिक सहयोग और सीमित व्यापारिक समझौते की दिशा में बढ़ने पर रहा।

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