वियतनाम इस समय गंभीर बाढ़ आपदा से जूझ रहा है। सरकार के अनुसार, शुक्रवार (31 अक्टूबर, 2025) तक मध्य वियतनाम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि 11 अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार भारी वर्षा और नदियों के उफान ने देश के कई हिस्सों को तबाह कर दिया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने मध्य वियतनाम के कई प्रांतों को जलमग्न कर दिया है। सबसे ज़्यादा असर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक शहर ह्यू (Hue) और होई एन (Hoi An) पर पड़ा है। राज्य मीडिया में प्रसारित तस्वीरों और वीडियोज़ में देखा जा सकता है कि इन दोनों शहरों की सड़कों पर पानी भर गया है और कई घरों की छतें तक बाढ़ के पानी में डूबी हुई हैं। होई एन की मशहूर पुरानी गलियाँ और लकड़ी की इमारतें, जो हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, अब जलमग्न दिखाई दे रही हैं।
सरकारी आपदा प्रबंधन एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस बाढ़ के कारण 1,16,000 से अधिक घरों और 5,000 हेक्टेयर से ज़्यादा कृषि भूमि पर बुरा असर पड़ा है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। सड़कों और रेलमार्गों को भी व्यापक क्षति पहुँची है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में परिवहन और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। स्थानीय प्रशासन, सेना और स्वयंसेवी संगठन बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। कई जगह नौकाओं के जरिए लोगों को निकाला जा रहा है। सरकार ने अस्थायी आश्रय स्थलों और राहत शिविरों की व्यवस्था की है, जहाँ लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
वियतनाम में हर साल जून से अक्टूबर के बीच मानसून और तूफानों के कारण बाढ़ और भूस्खलन आम बात है। हालांकि इस बार हुई बारिश की तीव्रता और मात्रा ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 24 घंटों में मध्य वियतनाम के कई हिस्सों में 500 मिलीमीटर से अधिक वर्षा हो सकती है। इससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से दक्षिण-पूर्व एशिया के देश, जिनमें वियतनाम भी शामिल है, अब पहले से कहीं अधिक बार और अधिक गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। समुद्र के बढ़ते स्तर और अनियमित वर्षा चक्र के कारण नदियों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करें। साथ ही, आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
फिलहाल, पूरे देश में चिंता का माहौल है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में पानी घटने के कोई आसार नहीं हैं और राहत दल चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। यह आपदा एक बार फिर याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है।