BSF ने चिन्हित किए पंजाब के ड्रोन हॉटस्पॉट, सीमा पार गतिविधियों का खुलासा

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पंजाब में नशीले पदार्थों की खेप ड्रोन के जरिए भेजी जाती है। सीमा पार से ये ड्रोन बॉर्डर से सटे इलाकों में भेजे जाते हैं। ऐसे में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बड़ी जानकारी दी है।

दुश्मन देश पाकिस्तान की ओर से पंजाब से सीटे सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे जाते हैं। सुरक्षा बल (BSF) ने पंजाब के उन स्थानों की पहचान कर ली है, जहां पर ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थ भेजे जाते हैं। बीएसएफ के अपर महानिदेशक (ADG-पश्चिमी कमान) सतीश एस खंडारे ने इस मामले में जानकारी दी।

BSF ने शुरू की एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनाती

बीएसएफ के एडीजी ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल पंजाब और जम्मू में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बड़े पैमाने पर ड्रोन रोधी प्रणाली तैनात कर रहा है, ताकि ड्रोन घुसपैठ को रोका जा सके और सीमा पार से हथियारों एवं मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाई जा सके।

कैसे हो रही है हथियारों व नशे की तस्करी

उन्होंने कहा कि बल जम्मू में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के प्रयासों को विफल करने के लिए एक सुरंग-रोधी प्रणाली भी स्थापित कर रहा है। खंडारे ने कहा कि 2025 में, बीएसएफ की पश्चिमी कमान ने 380 किलोग्राम से अधिक हेरोइन और 200 से अधिक हथियार जब्त किए, 278 अवैध ड्रोन बरामद किए और 53 पाकिस्तानी घुसपैठियों एवं तस्करों को पकड़ा। बीएसएफ ने अमृतसर में ड्रोन फोरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित की है।

ड्रोन की फोरेंसिक जांच

अधिकारी ने कहा, ‘हम बरामद किए एक ड्रोन का फोरेंसिक विश्लेषण करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने कितनी उड़ानें भरीं, कहां से उड़ान भरी और क्या गिराया। इस आधार पर, हमने मुख्य रूप से पंजाब और राजस्थान में कुछ मुख्य स्थानों की पहचान की है।’ अपर महानिदेशक ने कहा कि बीएसएफ दो तरीकों से इस पर अंकुश लगाता है, पहला ड्रोन रोधी प्रणाली स्थापित करके और दूसरा जवानों की तैनाती कर।

सीमाओं की सुरक्षा में अडिग प्रहरी

उन्होंने कहा, ‘बीएसएफ के जवान भी दुर्गम इलाकों में तैनात हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि ड्रोन से हथियारों और मादक पदार्थों की खेप दुर्गम इलाकों में ही गिराई जाएगी।’ खंडारे ने कहा कि 2019 में पंजाब में पहली बार मादक पदार्थ की तस्करी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की जानकारी मिली थी और उसके बाद से छोटे आकार के ड्रोन और खेप भेजने की कोशिश हुई है।

सीमा पार से बढ़ी सस्ते ड्रोन की घुसपैठ

उन्होंने कहा, ‘ड्रोन और खेप का आकार छोटा हो गया है। अब सस्ते ड्रोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पहले बड़े ड्रोन आते थे।’ उन्होंने कहा कि अब एक ड्रोन लगभग 500 ग्राम हेरोइन या एक पिस्तौल ले जा सकता है। खंडारे ने कहा, ‘फ्रीक्वेंसी हॉपिंग ड्रोन भी आ गए हैं और ड्रोन का पता लगाना मुश्किल हो गया है। जैसे ड्रोन तकनीक विकसित हो रही है, वैसे ही ड्रोन रोधी तकनीक भी विकसित हो रही है।’

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