कश्मीर में बारिश ने तोड़ी रिकॉर्ड कमी, झेलम सूखी—उम्मीद सिर्फ बर्फबारी से

69 0

वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और इसरो के अध्ययनों में पाया गया है कि हाल के दशकों में 18% से ज्यादा हिमालयी ग्लेशियर पीछे हट गए हैं. इससे झरनों की धारा कमजोर हो रही है और लिद्दर व पोहरू जैसी नदियों को पानी देने वाले जलग्रहण क्षेत्र सूखने लगे हैं.

कश्मीर घाटी इस समय गंभीर जलसंकट की स्थिति में है. लगातार कम बारिश और बर्फबारी के अभाव ने नदियों, सहायक नदियों और प्राकृतिक झरनों को सिकोड़ दिया है. घाटी की जीवनरेखा झेलम नदी कई प्रमुख स्टेशनों पर शून्य स्तर से नीचे पहुंच गई है, जिससे जल उपलब्धता पर संकट गहरा गया है. झेलम नदी का जल स्तर रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है.

संगम गेज स्टेशन पर झेलम जलस्तर -0.53 फीट तक पहुंच गया है .वही राम मुंशी बाग में  लगभग 3 फीट और आशाम  करीब 1 फीट पहुंच गया है. ये आंकड़े नदी में प्रवाह की भारी कमी और घाटी के जल संतुलन पर गंभीर असर का संकेत देते हैं. लिद्दर, रामबियारा, फिरोजपोरा नाला और पोहरू नदी जैसे प्रमुख स्रोत सामान्य स्तर से काफी नीचे बह रहे हैं. इससे बड़े पैमाने पर पीने के पानी, सिंचाई, और भूजल पुनर्भरण पर असर पड़ रहा है.

घाटी पूरी तरह ‘बहुत कम वर्षा’ जोन में

स्वतंत्र मौसम विश्लेषको का कहना है कि नवंबर में औसत वर्षा 35.2 मिमी होती है लेकिन इस बार सिर्फ 6.1 मिमी दर्ज हुई—यानी 83% कमी. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 10 दिनों तक शुष्क मौसम जारी रहेगा, हालांकि ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी हो सकती है.

ग्लेशियरों का पीछे हटना खतरे की घंटी

वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और इसरो के अध्ययनों में पाया गया है कि हाल के दशकों में 18% से ज्यादा हिमालयी ग्लेशियर पीछे हट गए हैं. इससे झरनों की धारा कमजोर हो रही है और लिद्दर व पोहरू जैसी नदियों को पानी देने वाले जलग्रहण क्षेत्र सूखने लगे हैं.

श्रीनगर में जलसंकट गहराया

जलस्तर में लगातार गिरावट के बीच श्रीनगर के कई इलाकों में नगरपालिका जलापूर्ति कम कर दी गई है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तुरंत संरक्षण उपाय जैसे कृत्रिम भूजल पुनर्भरण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और सालभर की जल योजना—नहीं अपनाई गई, तो कश्मीर को लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति झेलनी पड़ सकती है.

एक्सपर्ट्स का अलर्ट—“ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी”

कश्मीर विश्वविद्यालय के एक पर्यावरण शोधकर्ता कहते हैं कि
हम गंभीर हाइड्रोलॉजिकल तनाव की ओर बढ़ रहे हैं. अगर इस सर्दी बर्फबारी फिर कम हुई, तो कश्मीर में जल संकट पिछले दशक से भी अधिक घातक हो सकता है.

Related Post

मल्लिकार्जुन खड़गे से गणेश गोदियाल ने की मुलाकात, कल संभालेंगे पदभार, देहरादून में तैयारियां तेज

Posted by - November 15, 2025 0
देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष गणेश गोदियाल दिल्ली दौरे पर हैं. आज गणेश गोदियाल ने दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय…

आज गर्मी का रेड अलर्ट! दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 पार, यूपी-पंजाब-हरियाणा से बिहार तक भीषण लू

Posted by - May 23, 2026 0
देश का अधिकतर हिस्सा इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर और मध्य भारत में मई में…

गंगोलीहाट में खेल मैदान बना डंपिंग जोन, देवदार के पेड़ों को भारी नुकसान; खिलाड़ी और अभिभावक नाराज़

Posted by - November 6, 2025 0
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़): सरकार एक ओर खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने और खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने की बात कर रही है,…

बिहार चुनाव… राघोपुर में तेजस्वी बनाम तेज की लड़ाई, क्या BJP के नए प्लान से लिखी जाएगी नई कहानी?

Posted by - November 4, 2025 0
राघोपुर लालू परिवार की परंपरागत सीट है. लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अब तेजस्वी यादव. सभी ने यहां से…

दिल्ली में मेट्रो, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी, कितने मिनट पहले पहुंचे, यहां जानें

Posted by - November 14, 2025 0
राष्ट्रीय राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सभी यात्रियों को रेलवे स्टेशनों, मेट्रो स्टेशनों और हवाई अड्डे पर समय…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *