अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मध्य पूर्व से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अब कोई भी तेल टैंकर या कारोबारी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान के इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर, यूएई और ईरान से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल और एलएनजी इसी समुद्री मार्ग से होकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। अनुमान के अनुसार भारत का 30 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 70 प्रतिशत एलपीजी इसी मार्ग के जरिए देश तक पहुंचता है। ऐसे में यदि होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बाधित होती है तो भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरानी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, नियमों का उल्लंघन कर रहे दो जहाजों को निशाना भी बनाया गया है। इस घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद व्यापारिक और तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।
इस बीच अमेरिका ने ईरान को संघर्ष विराम की शर्तें मानने की चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने अपने रुख में किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। ऐसे में दुनिया की नजर अब मध्य पूर्व में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर बनी हुई है।