रूस-यूक्रेन युद्ध: मार्को रूबियो बोले—अमेरिका के बिना खत्म नहीं होगी जंग

77 0

जहां कीव (यूक्रेन) को पश्चिम से सैन्य और वित्तीय मदद मिल रही है, वहीं मॉस्को अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद डटा हुआ है. अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के उस ‘शांति फॉर्मूले’ पर हैं, जिसकी चर्चा मार्को रूबियो कर रहे हैं.

World News in Hindi: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले करीब तीन वर्षों से जारी भीषण युद्ध को लेकर अमेरिका ने अब तक का सबसे बड़ा दावा किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने शुक्रवार को स्पष्ट रूप से कहा कि पूरी दुनिया में केवल संयुक्त राज्य अमेरिका (America) ही वह इकलौती शक्ति है, जो रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) दोनों पक्षों को मेज पर लाकर इस युद्ध (War) को समाप्त करने का रास्ता निकाल सकती है.

‘धरती पर कोई दूसरा विकल्प नहीं’

साल के अंत में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में रूबियो ने कहा, ‘धरती पर सिर्फ एक ही देश और एक ही ऐसी संस्था है जो असल में दोनों पक्षों (रूस-यूक्रेन) से सीधा संवाद कर सकती है और शांति का रास्ता खोज सकती है, और वह है यूनाइटेड स्टेट्स.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन ने इस संघर्ष को सुलझाने के लिए न केवल सीनियर लेवल की भागीदारी दिखाई है, बल्कि अपना काफी कीमती समय भी लगाया है.

व्यापार से ज्यादा बैठकों का दौर

मार्को रूबियो ने खुलासा किया कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को लेकर कितने गंभीर हैं. उन्होंने बताया कि ट्रंप ने अपने हालिया कार्यकाल में यूक्रेन युद्ध पर किसी भी दूसरे विषय (यहां तक कि ट्रेड और इकोनॉमी भी) से ज्यादा बैठकें की हैं. हालांकि, रूबियो ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी देश पर अपनी कोई ‘डील’ थोपना नहीं चाहता. यह बातचीत इस बारे में है कि दोनों पक्ष असल में क्या चाहते हैं और शांति के बदले वे क्या छोड़ने या देने को तैयार हैं.

शांति की चाबी पुतिन और जेलेंस्की के पास

अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ किया कि शांति का अंतिम फैसला अमेरिका नहीं करेगा. रूबियो ने कहा, ‘यह फैसला अंततः यूक्रेन और रूस का होगा. इसमें बहुत समय और मेहनत लगती है, और ऐसे प्रयास मीडिया या प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं बल्कि बंद दरवाजों के पीछे कूटनीति से सफल होते हैं.

बदल गई दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था

फरवरी 2022 में रूस के हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा सैन्य संकट बन चुका है. इस जंग ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को पूरी तरह अस्थिर कर दिया है. यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था को नया स्वरूप दिया है. डिप्लोमेटिक गठबंधनों को फिर से परिभाषित किया है (जैसे रूस का उत्तर कोरिया और चीन के करीब जाना). जहां कीव (यूक्रेन) को पश्चिम से सैन्य और वित्तीय मदद मिल रही है, वहीं मॉस्को अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद डटा हुआ है. अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के उस ‘शांति फॉर्मूले’ पर हैं, जिसकी चर्चा मार्को रूबियो कर रहे हैं.

Related Post

भारत-चीन के बीच हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता, देशों पक्षों ने कही सीमा पर शांति और स्थिरता की बात

Posted by - October 29, 2025 0
भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की यह वार्ता 25 अक्टूबर को आयोजित की गई। कोर कमांडर स्तर…

भारत के अलावा किन देशों में होते हैं EVM से चुनाव? जानें पहली बार कब हुआ था इस्तेमाल

Posted by - November 5, 2025 0
EVM Facts: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की चर्चा हर चुनाव से पहले होती है, ऐसे में ये जानना जरूरी…

श्रीलंका का मददगार बना भारत और बढ़ाई सहायता, कोलंबो ने 25 में से 22 जिलों को घोषित किया आपदा से प्रभावित

Posted by - December 4, 2025 0
भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका की मदद को गई गुना बढ़ा दिया है। वहीं श्रीलंका में अब…

981 दिनों बाद ब्राज़ील की जर्सी में लौटे नेमार, नंबर 10 की वापसी ने भावुक कर दिए करोड़ों फ़ैन्स

Posted by - June 25, 2026 0
फुटबॉल जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक Neymar ने 981 दिनों के लंबे इंतजार के बाद ब्राज़ील की…

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमले फिर शुरू किए, काबुल की तरफ से जोरदार पलटवार

Posted by - December 6, 2025 0
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक, इस हफ्ते शुरू हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद दोनों देशों के…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *