देश में महंगाई ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते मई 2026 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है। शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। इससे पहले अप्रैल 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
National Statistical Office द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 4.78 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.20 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
किन वस्तुओं के दाम सबसे ज्यादा बढ़े?
मई के दौरान जिन वस्तुओं की कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, उनमें कीमती धातुओं के आभूषण, टमाटर, अदरक, किशमिश और मुनक्का शामिल रहे। दूसरी ओर आलू, मटर, जीरा, मोटर कार, जीप, मोटरसाइकिल और स्कूटर जैसी वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव महंगाई को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक बना हुआ है।
RBI ने भी बढ़ाया महंगाई का अनुमान
मौद्रिक नीति निर्धारण के दौरान Reserve Bank of India मुख्य रूप से खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। सरकार ने आरबीआई को महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है, जिसमें 2 प्रतिशत ऊपर या नीचे का दायरा निर्धारित है।
हाल ही में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी और ईंधन लागत बढ़ने से आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें बनीं बड़ी वजह
आरबीआई के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ा है। मई से अब तक पेट्रोल की कीमतों में लगभग 7.4 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिलता है।
आर्थिक वृद्धि दर पर भी असर की आशंका
इस बीच World Bank ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में भी कटौती की है। विश्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 7.7 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची ऊर्जा कीमतें, कच्चे माल की बढ़ती लागत और निजी मांग में संभावित कमजोरी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
खाद्य वस्तुओं और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो उपभोक्ताओं को रोजमर्रा के खर्चों में और अधिक दबाव महसूस हो सकता है। वहीं आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति बैठकों पर भी बाजार की नजरें टिकी रहें