अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के लिए हुए शांति समझौते का दुनियाभर के नेताओं ने स्वागत किया है। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। समझौते में सैन्य कार्रवाइयों को रोकने, क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।
यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम कदम बताया। उन्होंने समझौते को लागू करने और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने इस समझौते को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और पश्चिम एशिया की सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री यातायात बहाल करने और समझौते को जल्द लागू करने की अपील की। फ्रांस और ब्रिटेन ने समुद्री सुरक्षा प्रयासों में सहयोग का भी भरोसा दिया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सबसे पहले इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई समाप्त करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की मध्यस्थता भूमिका की भी सराहना की।
कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani ने समझौते को स्थायी शांति और वैश्विक आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कतर ने उम्मीद जताई कि आगे की बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में जारी रहेगी।
तुर्किये के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan ने भी समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।
यूरोप के प्रमुख देशों फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने संयुक्त बयान जारी कर इस समझौते को “कूटनीतिक सफलता” बताया और इसके शीघ्र एवं पूर्ण क्रियान्वयन की अपील की।