हरियाणा और राजस्थान के बीच तीन दशक से अधिक समय से चला आ रहा जल विवाद आखिरकार सुलझ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही इस ऐतिहासिक विवाद का समाधान हो गया। इस समझौते को राजस्थान के लिए बड़ी राहत और जल प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 1994 में हुए अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के तहत राजस्थान को यमुना नदी के पानी का हिस्सा आवंटित किया गया था, लेकिन तकनीकी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण राज्य को अपने हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा था। इसका सबसे ज्यादा असर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र—चूरू, झुंझुनूं और सीकर—पर पड़ा, जहां लंबे समय से पेयजल और सिंचाई संकट बना हुआ था।
नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma और हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने इस विवाद के स्थायी समाधान पर सहमति जताई।
समझौते के तहत हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हासियावास तक करीब 250 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन के जरिए विशेष रूप से मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त पानी को सीधे राजस्थान के जल संकट वाले इलाकों तक पहुंचाया जाएगा। संयुक्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्रीय जल आयोग को अंतिम मंजूरी के लिए भेज दी गई है।
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि 1994 के समझौते के अनुसार राजस्थान को जितना पानी मिलना था, अब उसे पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि नहरों के जरिए पानी पहुंचाने में काफी मात्रा में जल की हानि होती थी, इसलिए पाइपलाइन मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से शेखावाटी क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने, पेयजल संकट कम करने और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय विवाद का समाधान होने से जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय भी शुरू होगा।
यह समझौता न केवल राजस्थान के लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि देश में जल साझेदारी और सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है।