Crude Oil Price Hike: $120 तक पहुंच सकता है कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल से लेकर हवाई सफर, FMCG और ऑटो सेक्टर तक पड़ सकता है बड़ा असर
अगर आने वाले महीनों में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं और ऑटो, एविएशन, FMCG, पेंट, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, सीमेंट, स्टील और कृषि जैसे कई बड़े सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है। निवेश बैंक Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो इस साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
100 डॉलर के ऊपर पहुंचा कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रही। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों द्वारा तेल टैंकरों पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में बढ़ती अस्थिरता ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इन्हीं समुद्री मार्गों से गुजरता है। ऐसे में यदि सप्लाई प्रभावित होती है, तो तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
Goldman Sachs ने दी चेतावनी
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल निर्यात सामान्य नहीं हुआ, तो ब्रेंट क्रूड इस साल के अंत तक 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इससे दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्ट सबसे पहले होंगे प्रभावित
कच्चा तेल महंगा होने का सबसे पहला असर पेट्रोल और डीजल की लागत पर पड़ता है। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और इसका असर ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
ईंधन महंगा होने से ट्रक, बस, टैक्सी और माल ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी। जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो फल, सब्जियां, दूध, अनाज और अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है।
FMCG कंपनियों की बढ़ सकती है लागत
साबुन, शैम्पू, बिस्कुट, पैक्ड फूड, खाने का तेल और अन्य FMCG उत्पादों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक पेट्रोकेमिकल आधारित होता है। इसके अलावा इन उत्पादों की ढुलाई भी ट्रांसपोर्ट पर निर्भर करती है।
ऐसे में यदि कच्चा तेल महंगा होता है, तो कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। कई कंपनियां बढ़ी हुई लागत खुद वहन करेंगी, जबकि कुछ कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर भी बढ़ेगा दबाव
ऑटो सेक्टर पर दोहरा असर देखने को मिल सकता है। एक तरफ ईंधन महंगा होने से वाहन चलाने की लागत बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर और अन्य पेट्रोकेमिकल आधारित पार्ट्स भी महंगे हो सकते हैं।
इससे वाहन निर्माण की लागत बढ़ सकती है और नई गाड़ियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
पेंट, प्लास्टिक और केमिकल उद्योग होंगे प्रभावित
पेंट, प्लास्टिक पाइप, सिंथेटिक रबर, पैकेजिंग और कई तरह के औद्योगिक केमिकल सीधे तौर पर पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़े हैं। कच्चा तेल महंगा होने पर इन उत्पादों का कच्चा माल भी महंगा हो जाता है।
ऐसे में निर्माण लागत बढ़ने की संभावना रहती है। यदि कंपनियां अतिरिक्त लागत ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो बाजार में इन उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
टेक्सटाइल सेक्टर पर भी पड़ेगा असर
पॉलिएस्टर, नायलॉन और अन्य सिंथेटिक फाइबर पेट्रोकेमिकल उत्पादों से तैयार किए जाते हैं। कच्चा तेल महंगा होने से इनकी उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है।
इसका असर रेडीमेड कपड़ों, स्पोर्ट्सवियर और कई अन्य टेक्सटाइल उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
सीमेंट, स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं हो सकती हैं महंगी
सीमेंट और स्टील उद्योग में भारी मशीनों के संचालन और माल ढुलाई के लिए बड़ी मात्रा में डीजल का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बिटुमेन भी पेट्रोलियम से तैयार किया जाता है।
यदि कच्चा तेल लगातार महंगा रहता है तो सड़क, पुल, मेट्रो और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत भी बढ़ सकती है।
एविएशन सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव
हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है। एयरलाइंस के कुल खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बड़ी हिस्सेदारी होती है। कच्चा तेल महंगा होने से ATF की कीमत बढ़ेगी, जिससे एयरलाइंस के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियां यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालते हुए हवाई किराया बढ़ा सकती हैं।
खेती-किसानी पर भी होगा असर
खेती में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई पंप और फसल की ढुलाई के लिए डीजल का व्यापक इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ सकती है।
इसके अलावा उर्वरक, कृषि उपकरण और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ेगा। इससे कृषि उत्पादन महंगा होगा और आगे चलकर खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़ने की आशंका भी रहेगी।
आम लोगों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
यदि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो इसका असर लगभग हर घर पर दिखाई देगा। पेट्रोल-डीजल से लेकर हवाई यात्रा, किराना, पैकेज्ड फूड, कपड़े, निर्माण सामग्री और परिवहन तक कई चीजें महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों की रणनीति पर भी सभी की नजरें बनी रहेंगी।