भारत के FCRA कानून पर अमेरिका में क्यों मचा बवाल? ट्रंप की पार्टी के सांसद ने चर्च और ईसाइयों पर हमले का लगाया आरोप

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भारत में विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अब अमेरिका में भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने भारत सरकार के प्रस्तावित बदलावों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए संशोधनों से सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं के कामकाज में हस्तक्षेप करने का अधिकार मिल सकता है, जिसे उन्होंने ईसाई समुदाय पर सीधा हमला बताया।

वेस्ट वर्जीनिया से सांसद राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत में ईसाई समुदाय का इतिहास लगभग दो हजार वर्ष पुराना है। उनके अनुसार, संत थॉमस ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने के कुछ समय बाद भारत पहुंचे थे और तभी से देश में ईसाई समुदाय मौजूद है। ऐसे में यदि सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं से जुड़े विदेशी फंड पर नियंत्रण बढ़ाती है, तो यह धार्मिक स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रस्तावित कानून मौजूदा स्वरूप में पारित होता है, तो इसका असर भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक?

केंद्र सरकार ने फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 संसद में पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य उन संगठनों की विदेशी संपत्तियों और फंड के प्रबंधन के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाना है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका हो, जिन्होंने स्वयं पंजीकरण वापस कर दिया हो या जिनका लाइसेंस समय पर नवीनीकरण न होने के कारण समाप्त हो गया हो।

प्रस्तावित कानून के अनुसार केंद्र सरकार एक विशेष प्राधिकरण (Designated Authority) गठित कर सकेगी। यह प्राधिकरण ऐसे संगठनों की विदेशी सहायता से खरीदी गई संपत्तियों और धन का प्रबंधन करेगा।

धार्मिक संस्थानों को लेकर क्या प्रावधान है?

विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी संगठन की संपत्ति किसी धार्मिक स्थल—जैसे मंदिर, मस्जिद या चर्च—से जुड़ी है, तो उस स्थल के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना इसी विशेष प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल संपत्ति का प्रशासनिक प्रबंधन सुनिश्चित करना है, न कि धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करना।

सजा में भी प्रस्तावित बदलाव

प्रस्तावित संशोधन में FCRA नियमों के उल्लंघन पर मिलने वाली अधिकतम सजा को भी कम करने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान कानून में अधिकतम पांच वर्ष तक की जेल का प्रावधान है, जबकि नए संशोधन के तहत इसे घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि इससे कानून अधिक व्यावहारिक और संतुलित बनेगा।

कितनी विदेशी फंडिंग आती है?

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच देश के 13,520 संगठनों को विदेशों से लगभग 55,741 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई।

FCRA पोर्टल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 तक देश में 14,449 संगठनों के FCRA प्रमाणपत्र सक्रिय थे। वहीं 22,498 प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके हैं और 15,212 प्रमाणपत्रों की अवधि समाप्त हो चुकी है।

क्यों बढ़ा विवाद?

राइली मूर का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं पर अधिक नियंत्रण का अधिकार देगा। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य केवल विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और संपत्तियों के सुव्यवस्थित प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल भारत की संसद तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

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