झारखंड की राजधानी रांची में 14वीं जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षा परिणाम में कथित धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। राजधानी के जयपाल सिंह स्टेडियम में पिछले 13 दिनों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि इसकी तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों से की जा रही है, लेकिन दोनों के स्वरूप, नेतृत्व और प्रदर्शन के तरीके में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
क्या है छात्रों की मुख्य मांग?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा के परिणामों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।
छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—
- 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द किया जाए।
- पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
हालांकि मामले की जांच फिलहाल सीआईडी कर रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि कथित तौर पर 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक लेकर सीटें बेची गईं और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन से कैसे अलग है यह प्रदर्शन?
रांची का छात्र आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र धरना, नारे और ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर किसी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या पुलिस एवं मीडिया के साथ टकराव जैसी घटनाएं सामने नहीं आई हैं।
इसके विपरीत, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर तनाव, हंगामा और पुलिस व मीडिया के साथ टकराव की घटनाएं देखने को मिली थीं।
राजनीतिक दलों से बनाई दूरी
रांची आंदोलन की एक और बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों ने किसी भी राजनीतिक दल को अपने आंदोलन का हिस्सा नहीं बनने दिया है।
प्रदर्शन स्थल पर न तो किसी राजनीतिक पार्टी के झंडे लगाए गए हैं और न ही किसी दल के बैनर दिखाई दे रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्र हितों से जुड़ा है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
सरकार और नेताओं के खिलाफ नहीं हो रही व्यक्तिगत बयानबाजी
रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन के दौरान छात्र अपनी मांगों पर केंद्रित हैं। प्रदर्शन में किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी या अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। छात्र केवल परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
उम्र का अंतर भी माना जा रहा बड़ी वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की थी, जिनकी उम्र 15 से 25 वर्ष के बीच थी। वहीं रांची में प्रदर्शन कर रहे अधिकांश अभ्यर्थियों की उम्र 25 वर्ष से अधिक बताई जा रही है।
यही कारण बताया जा रहा है कि रांची का आंदोलन अपेक्षाकृत अधिक संयमित और शांतिपूर्ण दिखाई दे रहा है। हालांकि इसमें युवा अभ्यर्थी भी शामिल हैं, लेकिन नेतृत्व और भागीदारी में वरिष्ठ अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है।
आंदोलन पर बनी हुई है सभी की नजर
जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच रांची का यह आंदोलन झारखंड की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए अहम मुद्दा बन गया है। अब छात्रों की निगाह सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।