दिल्ली दंगा मामला: पांच साल से जेल में बंद उमर खालिद और अन्य आरोपी जमानत के हकदार, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

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सुप्रीम कोर्ट 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद, कार्यकर्ता शरजील इमाम और अन्य सह-आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोध प्रदर्शनों के नाम पर हिंसा भड़काने और “सरकार गिराने की साजिश” रची थी।

छात्र नेता उमर खालिद

27 अक्टूबर 2025 को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई को 31 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया। यह फैसला तब लिया गया जब दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।

पुलिस ने गुरुवार (30 अक्टूबर 2025) को सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा कि उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और गुलफिशा फातिमा ने सीएए विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल “कट्टरपंथी उत्प्रेरक” के रूप में किया। पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे और सशस्त्र विद्रोह भड़काने की साजिश रची थी।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन प्रदर्शनों का “मुख्य उद्देश्य” सरकार को बदनाम करना और देश के मुस्लिम समुदाय के खिलाफ “नरसंहार” की झूठी छवि बनाना था। हलफनामे में कहा गया है कि यह सब “राजनीतिक परिवर्तन” लाने की एक संगठित योजना का हिस्सा था।

वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि उमर खालिद को 5 साल से अधिक समय से बिना जमानत हिरासत में रखा गया है, जबकि अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि लंबी अवधि की हिरासत के बावजूद मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हुई है, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। वकीलों का कहना है कि मामला “विचाराधीन” है और अभियोजन पक्ष की ओर से बार-बार देरी की जा रही है, इसलिए अभियुक्त अब जमानत के हकदार हैं।

सुप्रीम कोर्ट में यह बहस अब एक संवेदनशील मोड़ पर है — एक तरफ दिल्ली पुलिस इस मामले को “राष्ट्र-विरोधी साजिश” करार दे रही है, जबकि दूसरी ओर, आरोपी पक्ष इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बता रहा है।

मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 2025 को निर्धारित है, जब सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस के जवाबी हलफनामे और बचाव पक्ष के तर्कों पर विचार करेगा।

 

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