19 अक्टूबर को अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई शीर्ष नेता समारोह में उपस्थित थे, लेकिन उप-मुख्यमंत्रियों के न होने से पार्टी में दरार और मतभेद की अटकलें शुरू हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, मौर्य की अनुपस्थिति का कारण बिहार में आगामी चुनाव की तैयारियों से जुड़ी व्यस्तताएँ थीं। मौर्य यूपी के साथ-साथ बिहार चुनाव में पार्टी के सह-प्रभारी हैं। उनके करीबी लोगों ने कहा कि अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि उप-मुख्यमंत्रियों ने अपना नाम कार्यक्रम विज्ञापनों में शामिल न होने के कारण वापस ले लिया। प्रोटोकॉल के अनुसार भी यह स्पष्ट नहीं था कि वे कार्यक्रम में किस स्थान पर बैठेंगे। इस मामले में नोडल विभाग, पर्यटन विभाग और सूचना विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर मतभेद दिखाई दिए।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “नौ साल में यह पहला दीपोत्सव है जिसमें उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक शामिल नहीं हुए। आधिकारिक तौर पर कोई कुछ नहीं कह रहा है, लेकिन इस गलतफहमी की जाँच होनी चाहिए।”
सत्ताधारी पार्टी में पिछले साल लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद से राज्य इकाई में मतभेद की चर्चा लगातार बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके तुरंत बाद 10 विधानसभा उपचुनावों की तैयारी की कमान संभाली, जबकि मौर्य बार-बार यह जताते रहे कि पार्टी सरकार से बड़ी है।
राज्य इकाई के कई नेताओं ने मौर्य को बिहार चुनाव सह-प्रभारी नियुक्त किए जाने पर भी ध्यान दिया। यह नियुक्ति उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है। उप-मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं ने कहा कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मामले को बेवजह मुद्दा बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि उप-मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति और कार्यक्रम के प्रोटोकॉल में उलझनें भाजपा में नौकरशाही और पार्टी नेताओं के बीच तनाव का संकेत हैं। हालांकि, पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर इसे सांकेतिक मुद्दा ही बताया है।