ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए सिर्फ पदकों की संख्या के लिहाज से ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की गहराई (Bench Strength) के मामले में भी बेहद खास रहे। इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने कई प्रतियोगिताओं में एक ही इवेंट के पोडियम पर दो-दो पदक जीतकर दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब केवल कुछ स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि कई खेलों में मजबूत और प्रतिस्पर्धी दल तैयार कर चुका है।
एथलेटिक्स से लेकर फील्ड इवेंट्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई बार पोडियम पर दो स्थान अपने नाम किए। यह उपलब्धि भारतीय खेलों की बढ़ती ताकत और लगातार बेहतर होती प्रतिभा का प्रमाण मानी जा रही है।
जैवलिन थ्रो में दो भारतीयों का जलवा
पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत ने यादगार प्रदर्शन किया। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सीजन बेस्ट थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
एक ही पोडियम पर दो भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय एथलेटिक्स की नई ऊंचाइयों को दुनिया के सामने पेश किया। यह यश वीर सिंह का पहला कॉमनवेल्थ पदक भी रहा, जबकि नीरज चोपड़ा ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई।
ट्रिपल जंप में भी भारत का डबल धमाका
पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रवीण चित्रवेल ने रजत पदक जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक हासिल कर भारत को एक ही इवेंट में दो पदक दिलाए।
दोनों खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने साबित किया कि भारत अब फील्ड इवेंट्स में भी लगातार मजबूत चुनौती पेश कर रहा है।
भारत की बढ़ती बेंच स्ट्रेंथ का संकेत
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में बार-बार एक ही पोडियम पर दो भारतीय खिलाड़ियों का पहुंचना इस बात का संकेत है कि देश में अब विश्वस्तरीय खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों से ही पदकों की उम्मीद रहती थी, वहीं अब अलग-अलग खेलों में कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन आने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों के लिए भी भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।