Al-Niño Alert 2026: कम बारिश और सूखे का खतरा, संसद में सरकार ने बताया कैसी है पूरी तैयारी

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देश में कमजोर मानसून और संभावित सूखे की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लगातार अल-नीनो (El Niño) की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने बताया कि 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए पहले ही सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया था, ताकि राज्यों और संबंधित एजेंसियों को समय रहते तैयारी का अवसर मिल सके।

क्या है अल-नीनो और क्यों बढ़ती है चिंता?

अल-नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका प्रभाव अक्सर मानसून को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है, जिससे वर्षा कम हो सकती है और सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि हर अल-नीनो वर्ष में कम बारिश होना जरूरी नहीं होता, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर लगातार निगरानी की जाती है।

1950 के बाद 16 बार आया अल-नीनो

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार—

  • 1950 के बाद 16 अल-नीनो वर्ष दर्ज किए गए।
  • इनमें से 7 वर्षों में मानसून पर स्पष्ट नकारात्मक असर पड़ा।
  • विशेष रूप से सितंबर महीने की बारिश पर अल-नीनो का प्रभाव अधिक देखने को मिला।

2026 मानसून के लिए पहले ही जारी कर दिया था अलर्ट

IMD ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले दीर्घकालिक पूर्वानुमान में बताया था कि इस वर्ष मानसून Long Period Average (LPA) का 92% रहने की संभावना है।

बाद में दूसरे पूर्वानुमान में इसे घटाकर 90% LPA कर दिया गया। इसी के साथ मौसम विभाग ने अल-नीनो विकसित होने की संभावना भी जताई थी।

सरकार कैसे कर रही है निगरानी?

लोकसभा में सरकार ने बताया कि IMD लगातार कई स्तरों पर निगरानी कर रहा है—

  • रोजाना मानसून की स्थिति और वर्षा का अपडेट
  • हर महीने अल-नीनो की स्थिति पर रिपोर्ट
  • जिला और ब्लॉक स्तर तक वर्षा संबंधी जानकारी
  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के साथ नियमित समन्वय बैठकें
  • किसानों के लिए साप्ताहिक वर्षा विश्लेषण और अगले दो सप्ताह का पूर्वानुमान

कृषि और जल प्रबंधन पर विशेष फोकस

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) भी कृषि, जलाशयों और सिंचाई से जुड़े विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

संस्थान मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर—

  • फसलों पर प्रभाव
  • जल भंडारण
  • बांध प्रबंधन
  • ENSO और अल-नीनो के असर

का विश्लेषण कर संबंधित एजेंसियों को नियमित जानकारी उपलब्ध करा रहा है।

राज्यों के लिए अलग गाइडलाइन नहीं

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 2026 में अल-नीनो को लेकर राज्यों के लिए कोई जिला-वार जोखिम आकलन रिपोर्ट या विशेष गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।

हालांकि IMD लगातार—

  • मौसम पूर्वानुमान
  • भारी बारिश
  • हीटवेव
  • अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं की शुरुआती चेतावनी

राज्य सरकारों और संबंधित विभागों को भेज रहा है ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।


मुख्य बातें (Highlights)

  • संसद में सरकार ने अल-नीनो को लेकर दी जानकारी।
  • IMD लगातार मानसून और अल-नीनो की निगरानी कर रहा है।
  • 2026 के लिए पहले ही सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया।
  • 1950 के बाद 16 अल-नीनो वर्षों में 7 बार मानसून पर बड़ा असर पड़ा।
  • PMO, गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के साथ नियमित समन्वय।
  • IITM कृषि और जल प्रबंधन पर विशेष अध्ययन कर रहा है।
  • राज्यों को नियमित मौसम अलर्ट भेजे जा रहे हैं।

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