राजस्थान के झालावाड़ जिले के मिश्रोली गांव के किसान मुकेश पाटीदार ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाई और आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इस विदेशी फल की खेती किसी कृषि विश्वविद्यालय या विशेषज्ञ से नहीं, बल्कि यूट्यूब पर वीडियो देखकर सीखी।
किसान के मुताबिक शुरुआत में इस खेती को लेकर काफी जानकारी जुटाई गई। उनके बेटे राहुल पाटीदार ने इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़े वीडियो देखे और इसके बाद परिवार ने इस नई फसल को अपनाने का फैसला किया।
400 पौधों से की शुरुआत
मुकेश पाटीदार ने अक्टूबर 2025 में अपने संतरे के बगीचे की खाली जमीन पर करीब 400 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए। पौधों को मजबूत बनाने के लिए सीमेंट के खंभों का सहारा दिया गया। करीब तीन साल की देखभाल और मेहनत के बाद अब पौधों में फल आने शुरू हो गए हैं।
कम पानी में तैयार होती है फसल
ड्रैगन फ्रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है। किसान ने पूरे खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई है, जिससे पानी की बचत के साथ पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहती है। प्रत्येक पौधे के बीच करीब 8 से 10 फीट की दूरी रखी गई है ताकि पौधों का विकास बेहतर हो सके।
एक बार मेहनत, फिर वर्षों तक कमाई
किसान का कहना है कि फिलहाल प्रत्येक पौधे से लगभग 1 किलो फल मिल रहा है, लेकिन जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाएंगे तो प्रति पौधा 8 से 10 किलो तक उत्पादन मिलने की संभावना है।
बाजार में ड्रैगन फ्रूट की कीमत करीब ₹200 प्रति किलो तक मिल जाती है। इसकी मांग कोटा, जयपुर, इंदौर जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी है। किसान का दावा है कि ड्रैगन फ्रूट का पौधा 20 से 25 साल तक फल देता है, इसलिए शुरुआती मेहनत के बाद लंबे समय तक अच्छी आमदनी की संभावना रहती है।
बीच की जमीन से भी हो रही अतिरिक्त आय
ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीच शुरुआती वर्षों में पर्याप्त खाली जगह रहती है। किसान इस जगह पर दूसरी नकदी फसलें भी उगा रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय मिल रही है और खेत का बेहतर उपयोग हो रहा है।
इन बातों का रखना पड़ता है ध्यान
मुकेश पाटीदार के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फफूंद जनित रोग हैं। इससे बचाव के लिए समय-समय पर कॉपर आधारित दवाओं का छिड़काव किया जाता है। नियमित निगरानी और उचित देखभाल से फसल को स्वस्थ रखा जा सकता है।
दूसरे किसानों के लिए बनी प्रेरणा
नई तकनीक, आधुनिक सोच और डिजिटल माध्यम से सीखी गई खेती ने मुकेश पाटीदार को सफलता दिलाई है। उनकी यह पहल अब क्षेत्र के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर आकर्षित कर रही है।