Share Market Closing Today: अमेरिकी-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। मजबूत वैश्विक संकेतों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के दम पर घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70% चढ़कर 78,639 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 390.70 अंक यानी 1.60% की तेजी के साथ 24,774.30 पर पहुंच गया।
बाजार में आई इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिला। केवल एक कारोबारी सत्र में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹4 लाख करोड़ बढ़ गया। पिछले चार कारोबारी दिनों में निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹11 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है।
आईटी और बैंकिंग शेयरों में शानदार खरीदारी
सोमवार के कारोबार में आईटी और बैंकिंग सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.28% की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, ऑटो, मेटल और पीएसयू बैंक इंडेक्स भी मजबूती के साथ बंद हुए।
हालांकि मीडिया सेक्टर पर दबाव देखने को मिला और निफ्टी मीडिया इंडेक्स करीब 3% टूटकर बंद हुआ।
इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती
निफ्टी 50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, इंडिगो, इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस और एक्सिस बैंक के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली।
वहीं दूसरी ओर अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा और भारती एयरटेल के शेयर दबाव में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी
बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.21% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.29% की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में भी बना हुआ है।
बाजार में तेजी की बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार को मजबूती दी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी और घरेलू आर्थिक संकेतकों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
एक्सपर्ट की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक मौजूदा समय में भारतीय बाजार वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती दिखा रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक, कॉर्पोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने की बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना चाहिए। मल्टी-कैप रणनीति अपनाकर जोखिम को संतुलित किया जा सकता है।