भारत के समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सोमवार को “भारत समुद्री सप्ताह 2025” के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 5 अरब अमेरिकी डॉलर की ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना देश के समुद्री विश्व व्यापार को कई गुना बढ़ा देगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत भारत आज “लोकतांत्रिक स्थिरता” और “नौसैनिक शक्ति” के दम पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है। शाह ने कहा—“भारत ने हिंद-प्रशांत और वैश्विक दक्षिण के बीच की खाई को पाट दिया है। अब हमारा लक्ष्य है कि समुद्री क्षेत्र को विकास और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाया जाए।

ग्रेट निकोबार परियोजना से नया आर्थिक गलियारा बनेगा
शाह ने बताया कि ग्रेट निकोबार परियोजना भारत के लिए केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना नहीं, बल्कि समुद्री अर्थव्यवस्था के विस्तार का माध्यम है। इस प्रोजेक्ट के ज़रिए भारत न सिर्फ अपने विश्व व्यापार मार्गों को मज़बूत करेगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक रणनीतिक व्यापार हब के रूप में भी उभरेगा।
उन्होंने कहा, “यह परियोजना भारत के समुद्री व्यापार को कई गुना बढ़ा देगी और करोड़ों युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करेगी। समुद्री क्षेत्र में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश अवसर मौजूद हैं।

जहाज निर्माण में भारत का नया लक्ष्य
अमित शाह ने यह भी बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि भारत जहाज निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल हो।
उन्होंने कहा कि देश के डीप-ड्राफ्ट पोर्ट्स (गहरे बंदरगाहों) का विकास करके कार्गो हैंडलिंग क्षमता को तीन गुना बढ़ाया जाएगा — यानी 10,000 मिलियन मेट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) तक पहुँचाया जाएगा।
वधावन पोर्ट बनेगा विश्वस्तरीय केंद्र
गृह मंत्री ने बताया कि मुंबई के पास वधावन पोर्ट 10 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश से बन रहा है, और यह पहले ही दिन विश्व के शीर्ष 10 बंदरगाहों में शामिल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि “सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों ने भारत को वैश्विक समुद्री क्षेत्र में एक उभरती हुई शक्ति बना दिया है। हम एक नया समुद्री इतिहास लिखने के कगार पर हैं।”

सर्बानंद सोनोवाल और मंत्रालय के सचिव का बयान
कार्यक्रम में केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि “निवेश और विकास के लिए शांति और कानून का पालन करने वाला समाज आवश्यक है। भारत ने यही वातावरण तैयार किया है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।” मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बताया कि भारत समुद्री सप्ताह 2025 में 11 देशों से 1.5 लाख पंजीकरण हुए हैं। इस आयोजन में 350 से अधिक विदेशी वक्ता हिस्सा ले रहे हैं और विभिन्न उप-क्षेत्रों में 10 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के 680 निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। इन परियोजनाओं से 7 लाख नए रोज़गार अवसर उत्पन्न होंगे।
भारत की समुद्री ताकत का नया युग
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) को नई दिशा देगी। यह परियोजना न केवल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बंदरगाह, जहाजरानी, और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगी। जैसे-जैसे यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, भारत का समुद्री व्यापार नेटवर्क एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण पुल का काम करेगा। इससे न केवल भारत की आर्थिक गति तेज होगी, बल्कि देश एक वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करेगा।