जानिये क्या कहा श्री कृष्ण ने सत्यभामा से जब उन्होंने पूछा में आपको कैसी लगती हूँ

72 0

एक बार सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा – मैं आप को कैसी लगती हूँ ? श्रीकृष्ण ने कहा तुम मुझे नमक जैसी लगती हो। सत्यभामा इस तुलना को सुन कर क्रुद्ध हो गयी, तुलना भी की तो किस से, आपको इस संपूर्ण विश्व में मेरी तुलना करने के लिए और कोई पदार्थ नहीं मिला।

श्रीकृष्ण ने उस वक़्त तो किसी तरह सत्यभामा को मना लिया और उनका गुस्सा शांत कर दिया। कुछ दिन पश्चात श्रीकृष्ण ने अपने महल में एक भोज का आयोजन किया। छप्पन भोग की व्यवस्था हुई। श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम आठों पटरानियों को, जिनमें पाकशास्त्र में निपुण सत्यभामा भी थी, से भोजन प्रारम्भ करने का आग्रह किया।

सत्यभामा ने पहला कौर मुँह में डाला मगर यह क्या.. सब्जी में नमक ही नहीं था। सत्यभामा ने उस कौर को मुँह से निकाल दिया। फिर दूसरा कौर मावा-मिश्री का मुँह में डाला और फिर उसे चबाते-चबाते बुरा सा मुँह बनाया और फिर पानी की सहायता से किसी तरह मुँह से उतारा।

अब तीसरा कौर फिर कचौरी का मुँह में डाला और फिर.. आक्..थू ! तब तक सत्यभामा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था। जोर से चीखीं.. किसने बनाई है यह रसोइ ?

सत्यभामा की आवाज सुन कर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए सत्यभामा के पास आये और पूछा क्या हुआ देवी ? कुछ गड़बड़ हो गयी क्या ? इतनी क्रोधित क्यों हो ? तुम्हारा चेहरा इतना तमतमा क्यूँ रहा है ? क्या हो गया ?

सत्यभामा ने कहा किसने कहा था आपको भोज का आयोजन करने को ? इस तरह बिना नमक की कोई रसोई बनती है ? किसी वस्तु में नमक नहीं है। मीठे में शक्कर नहीं है। एक कौर नहीं खाया गया। किसी तरह से पानी की सहायता से एक कौर मावा का गले से नीचे उतारा।

श्रीकृष्ण ने बड़े भोलेपन से पूछा, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था, तो क्या हुआ बिना नमक के ही खा लेती।

सत्यभामा फिर चीख कर बोली लगता है दिमाग फिर गया है आपका ? बिना शक्कर के मिठाई तो फिर भी खायी जा सकती है मगर बिना नमक के कोई भी नमकीन वस्तु नहीं खायी जा सकती है।

तब श्रीकृष्ण ने अपनी बालसुलभ मुस्कान के साथ कहा तब फिर उस दिन क्यों गुस्सा हो गयी थी जब मैंने तुम्हे यह कहा कि तुम मुझे नमक जितनी प्रिय हो।

अब सत्यभामा को सारी बात समझ में आ गयी की यह सारा वाक्या उसे सबक सिखाने के लिए था और उस की गर्दन झुक गयी जबकि अन्य रानियाँ मुस्कुराने लगी।

कहानी का तात्पर्य यह है कि स्त्री जल की तरह होती है, जिसके साथ मिलती है उसका ही गुण अपना लेती है।

स्त्री नमक की तरह होती है, जो अपना अस्तित्व मिटा कर भी अपने प्रेम प्यार तथा आदर-सत्कार से परिवार को ऐसा बना देती है।

Related Post

देवार्क सूर्य मंदिर, सूर्य उपासना का एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध स्थल है।

Posted by - October 27, 2025 0
बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देवार्क सूर्य मंदिर, सूर्य उपासना का एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध स्थल है। यह मंदिर…

राम भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, अयोध्या में पूरा हुआ राम मंदिर का निर्माण कार्य; जानें ट्रस्ट ने क्या कहा?

Posted by - October 27, 2025 0
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसकी जानकारी दी…

जैन मुनि के 6 महीने लंबे निराहार व्रत से दुनिया हुई हैरान, आत्मबल से असंभव को बनाया संभव

Posted by - November 11, 2025 0
आचार्य हंसरत्न सूरीश्वरजी महाराज एक ऐसे जैन मुनि हैं, जिन्होंने अपने आत्मबल से 2-3 नहीं बल्कि 180 दिन यानि छह…

There are 1 comments

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *