12 साल में 17 करोड़ रोजगार, बेरोजगारी 3.1% पर: Gen Z की नाराज़गी के बीच मोदी सरकार ने पेश किया रोजगार रिपोर्ट कार्ड

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देश में बेरोजगारी और रोजगार को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने अपने 12 वर्षों का रोजगार रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। एनडीए सांसदों की बैठक में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच भारत में 17 करोड़ से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। सरकार के अनुसार इस अवधि में औसतन 1.7 करोड़ रोजगार प्रति वर्ष पैदा हुए और बेरोजगारी दर घटकर 3.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) और विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत का रोजगार प्रदर्शन कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर रहा है। उन्होंने दावा किया कि यूपीए शासनकाल (2004-2014) की तुलना में रोजगार सृजन की गति लगभग छह गुना बढ़ी है।

सरकार के मुताबिक औपचारिक रोजगार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत पंजीकृत प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार हुआ है और स्नातकों की रोजगार योग्यता में 66 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

मनसुख मांडविया ने बताया कि मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और लखपति दीदी जैसी योजनाओं ने रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही में सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये के रोजगार एवं कौशल विकास पैकेज की भी घोषणा की है, जिसके तहत 4.1 करोड़ युवाओं को लाभ पहुंचाने और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का कहना है कि रेलवे, सड़क, मेट्रो, हवाई अड्डों, ऊर्जा और शहरी विकास जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश से करीब 5.88 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। विनिर्माण क्षेत्र में कार्यबल की भागीदारी बढ़कर 25.14 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसे सरकार विकसित देशों के बराबर का प्रदर्शन बता रही है।

प्रस्तुति में यह भी दावा किया गया कि वर्ष 2014 से 2023 के बीच करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। वहीं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़कर 101 करोड़ से अधिक लोगों (68.4%) तक पहुंच गया है, जबकि वर्ष 2015 में यह संख्या केवल 25 करोड़ (19%) थी।

हालांकि, रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर बहस जारी है। ऐसे समय में, जब युवाओं विशेषकर Gen Z के बीच नौकरी के अवसरों को लेकर असंतोष की चर्चा हो रही है, सरकार ने अपने रोजगार प्रदर्शन को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है।

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