लूवर संग्रहालय में डकैती के बाद सुरक्षा पर उठे सवाल, कैमरा सिस्टम का पासवर्ड निकला ‘लूवर’

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फ्रांस के प्रतिष्ठित लूवर संग्रहालय में 102 मिलियन डॉलर मूल्य के बहुमूल्य गहनों की चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना ने न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल की खामियों को उजागर किया, बल्कि यह खुलासा भी किया कि संग्रहालय के वीडियो निगरानी प्रणाली का पासवर्ड बेहद साधारण था — “लूवर”। इस पासवर्ड का सामने आना सुरक्षा विशेषज्ञों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डकैती केवल सात मिनट में अंजाम दी गई। चोरों ने संग्रहालय की ऊपरी मंज़िल पर स्थित अपोलो गैलरी को निशाना बनाया, जहाँ विश्व प्रसिद्ध और अत्यंत मूल्यवान रत्न और आभूषण प्रदर्शित किए जाते हैं। चोरों ने संग्रहालय के बाहर खड़े ट्रक पर लगी सीढ़ी की मदद से खिड़की से अंदर प्रवेश किया और दो हाई-सिक्योरिटी डिस्प्ले केस तोड़कर कुल नौ मूल्यवान वस्तुएँ लेकर फरार हो गए।

लूवर संग्रहालय के निदेशक ने फ्रांसीसी सांसदों को जानकारी देते हुए कहा कि चोरी के समय सुरक्षा प्रणाली कार्यरत थी। उन्होंने कहा, “सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा था, लेकिन यह हमला उस तरीके का था जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। अब हमें सुरक्षा को उस स्तर पर अपडेट करने की जरूरत है जिससे भविष्य में ऐसे नए तरीकों का मुकाबला किया जा सके।”

इस बीच, फ्रांसीसी अधिकारियों ने डकैती के आरोप में चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें एक महिला और तीन पुरुष शामिल हैं। पेरिस अभियोजक लॉरे बेक्वाउ ने बताया कि इनका किसी बड़े संगठित अपराध गिरोह से संबंध नहीं है। संदिग्ध पेरिस के सीन-सेंट-डेनिस क्षेत्र के निवासी हैं और इनमें से दो के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जिस संदिग्ध को मुख्य आरोपी माना जा रहा है, उसके खिलाफ पहले 11 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 10 डकैती से जुड़े हैं। एक अन्य आरोपी के खिलाफ 15 मामले, जिनमें 2 डकैती के हैं, पहले से दर्ज मिले। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना इस बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है कि संगठित अपराध गिरोहों से न जुड़े लोग भी अब बड़े स्तर पर तेज़ और योजनाबद्ध अपराधों को अंजाम देने लगे हैं

लूवर की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने प्रतिष्ठित और उच्च स्तरीय संस्थान की निगरानी प्रणाली का पासवर्ड इतना साधारण और अनुमान लगाने योग्य कैसे हो सकता था। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस मामले को ‘मूलभूत सुरक्षा नियमों की अनदेखी’ बताया।

यह घटना दुनिया के सबसे प्रसिद्ध संग्रहालयों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था के स्तर पर गहरी बहस छेड़ चुकी है। आगे आने वाले दिनों में फ्रांसीसी सरकार और संग्रहालय प्रशासन सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव कर सकता है।

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