शिवसेना के 60 साल: स्थापना दिवस पर सियासी शक्ति प्रदर्शन, मुंबई पुलिस अलर्ट पर

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महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों तक मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की राजनीति का बड़ा चेहरा रही शिवसेना आज अपने 60वें स्थापना दिवस का जश्न मना रही है। लेकिन इस बार का स्थापना दिवस पहले की तरह एकजुटता का प्रतीक नहीं, बल्कि पार्टी के दो गुटों के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष का मंच बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना। दोनों गुट अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं।

स्थापना दिवस से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

स्थापना दिवस समारोह ऐसे समय पर हो रहा है जब शिवसेना के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल तेज है। हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के बागी रुख ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित बैठक में इन सांसदों की गैरमौजूदगी ने अटकलों को और हवा दी। बाद में इन सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शिंदे गुट के साथ विलय की मांग किए जाने की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थापना दिवस के मौके पर दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों के बीच यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि असली शिवसेना कौन है और बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर किसका अधिकार है।

मुंबई पुलिस ने जारी किया अलर्ट

दोनों गुटों के कार्यक्रमों और हालिया बयानबाजी को देखते हुए मुंबई पुलिस ने कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने एक एडवाइजरी जारी कर संभावित विरोध-प्रदर्शन, नारेबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की आशंका जताई है।

पुलिस के अनुसार, गोरेगांव और सायन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के आमने-सामने आने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी जाए।

शिंदे गुट का हिंदुत्व पर जोर

स्थापना दिवस से पहले शिंदे गुट ने एक विशेष टीजर जारी किया है, जिसमें शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के पुराने और चर्चित बयानों को प्रमुखता से दिखाया गया है। टीजर में बालासाहेब का मशहूर बयान—“मैं शिवसेना को कांग्रेस नहीं बनने दूंगा” और “I am a mad, mad Hindu” शामिल किया गया है।

शिवसेना सांसद और लोकसभा गुट के नेता डॉ. श्रीकांत शिंदे द्वारा जारी इस टीजर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ही बालासाहेब ठाकरे के मूल विचारों और हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। टीजर में यह भी कहा गया है कि पार्टी में कोई मालिक या नौकर नहीं है, बल्कि सभी कार्यकर्ता हैं।

उद्धव गुट भी करेगा शक्ति प्रदर्शन

दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट भी स्थापना दिवस के अवसर पर बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया जाए कि शिवसेना की मूल पहचान, संगठन और विचारधारा आज भी उद्धव ठाकरे के साथ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थापना दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि आगामी चुनावी राजनीति और शिवसेना की विरासत की लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकता है।

क्यों खास है इस बार का स्थापना दिवस?

  • शिवसेना की स्थापना को पूरे हुए 60 वर्ष।
  • पार्टी दो बड़े गुटों में विभाजित है।
  • छह सांसदों की बगावत ने राजनीतिक समीकरण बदले।
  • दोनों गुट अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • मुंबई पुलिस ने संभावित टकराव को लेकर सुरक्षा बढ़ाई है।
  • बालासाहेब ठाकरे की विरासत और असली शिवसेना को लेकर सियासी जंग तेज है।

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